अकाली दल-BJP गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार; इन 3 सवालों में उलझा पंजाब का चुनावी गणित

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दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 'कॉकरोच जनता pary' द्वारा आगामी 5 सितंबर 2026 को इंडिया गेट पर आयोजित किए जाने वाले विरोध प्रदर्शन के लिए अभी तक कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मांगी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा नियमों के तहत बिना पूर्व प्रशासनिक मंजूरी के इस अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार के जमावड़े की अनुमति नहीं दी जाएगी।

1. सीटों की संख्या 

गठबंधन के भविष्य को लेकर सबसे बड़ा टकराव सीटों की संख्या पर है।

  • भाजपा की मांग: पार्टी अब पंजाब में छोटे भाई की भूमिका से बाहर निकलना चाहती है। भाजपा 117 में से कम से कम 55 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है l
  • अकाली दल का रुख: अकाली दल पुराने ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर खुद को बड़े भाई की भूमिका में देखना चाहता है और भाजपा को अधिकतम 45 सीटें देने के पक्ष में है l

2. सीटों की पहचान 

पहले भाजपा केवल शहरी क्षेत्रों और अकाली दल ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ता था, लेकिन इस बार समीकरण बदल चुके हैं। 

  • बदली रणनीति: भाजपा अब केवल शहरी सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती; वह सिख बहुल और ग्रामीण इलाकों की सीटों पर भी दावा ठोक रही है।
  • पेच: दोनों दलों के बीच इस बात को लेकर कशमकश है कि कौन सी पारंपरिक सीटें किसके पाले में जाएंगी, ताकि जमीनी कैडर में कोई असंतोष न हो। 

3. मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा 

सत्ता की साझेदारी का फॉर्मूला तय करना इस समय सबसे पेचीदा सवाल है। 

  • अकाली दल का दावा: अकाली दल चाहता है कि सुखबीर सिंह बादल को गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद का घोषित चेहरा बनाया जाए।
  • भाजपा का संकोच: भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का एक धड़ा सुखबीर बादल के नाम पर तुरंत सहमत नहीं है। चर्चा यह भी है कि यदि अकाली दल को मुख्यमंत्री पद मिलता है, तो भाजपा अपने नेता के लिए उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) का पद और महत्वपूर्ण विभाग सुनिश्चित करना चाहती है।

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