सोनिया गांधी का संस्मरण: प्रकाशन से पहले ही राजनीतिक गलियारों में हलचल, ये हैं 3 बड़े विवादित मुद्दे

feature-top

सोनिया गांधी के संस्मरण (Memoir) के प्रकाशन से जुड़ा विवाद इस समय भारतीय राजनीति में गरमाया हुआ है। इस बहुप्रतीक्षित किताब के आने से पहले ही इसके कुछ हिस्सों और राजनीतिक घटनाक्रमों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

इस पूरे विवाद के 3 सबसे बड़े फ्लैशपॉइंट (Flashpoints) निम्नलिखित हैं:

1. 2004 में प्रधानमंत्री पद न लेने का असली कारण

  • विवाद की वजह: किताब में इस बात का खुलासा होने की उम्मीद है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से क्यों इनकार किया था।
  • फ्लैशपॉइंट: जहां कांग्रेस हमेशा इसे सोनिया गांधी का 'त्याग' बताती रही है, वहीं विपक्ष (विशेषकर भाजपा) का दावा रहा है कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा उनकी नागरिकता या अन्य तकनीकी मुद्दों पर आपत्ति जताने के कारण वे पीछे हटी थीं। किताब में इस पर आने वाला सोनिया गांधी का अपना पक्ष सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है।

2. डॉ. मनमोहन सिंह और पीएमओ (PMO) का रिमोट कंट्रोल

  • विवाद की वजह: संस्मरण में संप्रग (UPA) सरकार के 10 साल के कार्यकाल (2004-2014) और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ सोनिया गांधी के समीकरणों का विवरण है।
  • फ्लैशपॉइंट: विपक्ष हमेशा आरोप लगाता रहा है कि मनमोहन सिंह सरकार को सोनिया गांधी 'रिमोट कंट्रोल' (राष्ट्रीय सलाहकार परिषद - NAC के जरिए) से चलाती थीं। इस किताब में सत्ता के दो केंद्रों (Two Centers of Power) के इस नैरेटिव पर सोनिया गांधी की सफाई और पार्टी के आंतरिक फैसलों के खुलासे को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ गया है।

3. राहुल गांधी की राजनीतिक लॉन्चिंग और अंदरूनी मतभेद

  • विवाद की वजह: सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की राजनीति में एंट्री, उनके संघर्षों और कांग्रेस के भीतर के असंतोष (जैसे G-23 नेताओं का विद्रोह) पर खुलकर बात की है।
  • फ्लैशपॉइंट: पार्टी के भीतर और बाहर के आलोचक इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस के लगातार चुनावी नुकसानों, राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर उठे सवालों और पार्टी के पुराने नेताओं के साथ हुए मतभेदों को किस तरह से पेश किया है।



feature-top