मातृभूमि का संस्कार और कर्मभूमि का सम्मान; न्यू जर्सी में मोहन भागवत ने प्रवासियों को दिया नया मंत्र

feature-top

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में रह रहे प्रवासी भारतीयों को अपनी 'कर्मभूमि' के प्रति वफादार रहने और वहां के समाज के साथ पूरी तरह घुलने-मिलने का एक बड़ा संदेश दिया है। अमेरिका के न्यू जर्सी में 'हिंदू स्वयंसेवक संघ' (HSS) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि प्रवासी भारतीयों को अपनी कर्मभूमि यानी जिस देश में वे रह रहे हैं और कमा रहे हैं, उसके प्रति अपने नागरिक कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "जब आप अमेरिका में हों, तो अमेरिकी की तरह व्यवहार करें।"

'कर्मभूमि' और 'मातृभूमि' के बीच संतुलन जरूरी
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी भी देश में रहने वाले भारतीयों को वहां के स्थानीय नियमों, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने का पूरा सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया में रचने-बसने के बाद भी अपनी 'मातृभूमि' (भारत) से जुड़े रहना बेहद जरूरी है। प्रवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी कर्मभूमि के प्रति समर्पित रहने के साथ-साथ अपनी मूल संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सनातन संस्कारों को जीवित रखना हर भारतीय का दायित्व है।

विश्व कल्याण ही हिंदू संस्कृति का मूल आधार
आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि हिंदू संस्कृति कभी किसी का जबरन धर्मांतरण कराने या किसी को बदलने की बात नहीं करती। हमारी संस्कृति पूरे विश्व को एक परिवार (वसुधैव कुटुंबकम्) मानकर सबके कल्याण और शांति की कामना करती है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर प्रवासी भारतीय अपनी प्रतिभा और संस्कारों के बल पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं और उन्हें इसी तरह दोनों देशों के बीच एक सेतु की भूमिका निभानी चाहिए। इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में अमेरिका के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों भारतीय परिवारों, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने हिस्सा लिया।


feature-top