छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के लगातार कमजोर होते आधार और घटती हिंसा के कारण अब वहाँ वीआईपी नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। लंबे समय से बस्तर को अति-संवेदनशील मानकर जनप्रतिनिधियों को बुलेटप्रूफ गाड़ियां, एनएसजी/सीआरपीएफ का घेरा और कड़े प्रोटोकॉल दिए जाते रहे हैं। अब सुरक्षा बलों की सफलता और क्षेत्र में शांति स्थापित होने के साथ यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस भारी-भरकम सुरक्षा तंत्र और खर्च में कटौती कर संसाधनों को आम जनता के विकास और पुलिसिंग में लगाया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के लगातार कमजोर होते आधार और घटती हिंसा के कारण अब वहाँ वीआईपी नेताओं और अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। लंबे समय से बस्तर को अति-संवेदनशील मानकर जनप्रतिनिधियों को बुलेटप्रूफ गाड़ियां, एनएसजी/सीआरपीएफ का घेरा और कड़े प्रोटोकॉल दिए जाते रहे हैं। अब सुरक्षा बलों की सफलता और क्षेत्र में शांति स्थापित होने के साथ यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस भारी-भरकम सुरक्षा तंत्र और खर्च में कटौती कर संसाधनों को आम जनता के विकास और पुलिसिंग में लगाया जाएगा।


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