- Home
- टॉप न्यूज़
- रायपुर
- इलाहाबाद हाई कोर्ट : जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ सीधे हाई कोर्ट में एफआईआर की अर्जी मंजूर नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट : जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ सीधे हाई कोर्ट में एफआईआर की अर्जी मंजूर नहीं
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली एक आपराधिक रिट याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता स्थानीय मजिस्ट्रेट के पास जाने के कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किए बिना सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट का रुख नहीं कर सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा मामला दर्ज न करने की स्थिति में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत उचित कानूनी विकल्प मौजूद हैं, जिनका पालन किया जाना अनिवार्य है l
आरोप और पूरा विवाद
यह याचिका वाराणसी के एक वकील रमेश उपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। मामले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- जाति और शंकराचार्यों पर टिप्पणी: याचिकाकर्ता का आरोप था कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यूट्यूब पर प्रसारित वीडियो में 'उपाध्याय' समुदाय को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके साथ ही उन्होंने चारों शंकराचार्यों को "फर्जी" बताया था।
- भावनाएं आहत होने का दावा: याचिका में दावा किया गया कि इन बयानों से समाज में उनकी अवमानना हुई और सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
- निचली अदालतों को नजरअंदाज करना: याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में वाराणसी के पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं राज्य सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कभी स्थानीय थाने या मजिस्ट्रेट का दरवाजा नहीं खटखटाया।
"प्रक्रिया से ऊपर सहानुभूति नहीं" : हाई कोर्ट
हाई कोर्ट की बेंच ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिकाएं दायर करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई और प्रक्रियात्मक अनुशासन पर जोर दिया:
- मजिस्ट्रेट के पास है अधिकार: अदालत ने कहा कि बीएनएसएस (BNSS) की धारा 173(4) और 175(3) के तहत पीड़ित व्यक्ति को सीधे संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाने का अधिकार है। हाई कोर्ट को सीधे शुरुआती मंच नहीं बनाया जा सकता l
- सहानुभूति से बड़ी प्रक्रिया: कोर्ट ने ललिता कुमारी मामले का हवाला देते हुए माना कि संज्ञेय अपराध होने पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि "यह कर्तव्य पुलिस की विफलता की स्थिति में उपलब्ध अन्य वैधानिक उपचारों को बायपास करने की छूट नहीं देता। सहानुभूति कानूनी प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकती।"
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिका को योग्यता विहीन मानते हुए खारिज कर दिया, हालांकि कानून के तहत याचिकाकर्ता को स्थानीय मजिस्ट्रेट की अदालत में जाने की पूरी आजादी दी है।
About Babuaa
Categories
Contact
0771 403 1313
786 9098 330
babuaa.com@gmail.com
Baijnath Para, Raipur
© Copyright 2019 Babuaa.com All Rights Reserved. Design by: TWS
- ज़रा हटके
- टॉप न्यूज़
- एंटरटेनमेंट
- लाइफस्टाइल
- विचार
- ऐतिहासिक
- खेल
- राजनीति
- देश-विदेश
- फोटोज़
- वीडियोस
- लेख
- संपादक की पसंद
- Research
- DPR Chhattisgarh
- West Bengal Election Result Update
- Assam Election Result Update
- Tamilnadu Election Result Update
- Kerala Election Result Update
- Puducherry Election Result Update
- राज्य
