सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी सुरक्षा को लेकर चिंतित निशु आज़ाद

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सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद 14 वर्षीय छात्र प्रदर्शनकारी निशु आज़ाद ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई है। 10वीं कक्षा की इस नाबालिग छात्रा ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी जान का खतरा बताते हुए कहा कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उनका पूरा परिवार बेहद डरा हुआ है।

"मैं अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हूं"—निशु आज़ाद

निशु आज़ाद ने शीर्ष अदालत के मौखिक निर्देशों के बाद दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस को सोशल मीडिया (X) पर टैग करते हुए अपनी गंभीर स्थिति साझा की:

  • पुलिस की ढिलाई: निशु का दावा है कि अदालत की कड़ी टिप्पणियों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है।
  • क्रॉस-एफआईआर (Cross-FIRs) से फंसाने की साजिश: छात्रा ने आरोप लगाया कि उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में "फर्जी क्रॉस-एफआईआर" दर्ज की गई हैं। उसे डर है कि उसे अदालतों में खींचने और किसी सुनसान जगह पर घेरकर हमला करने के मकसद से ऐसा किया जा रहा है।
  • पढ़ाई पर पड़ा असर: लगातार मिल रही बलात्कार और जान से मारने की धमकियों के कारण निशु ने स्कूल और ट्यूशन जाना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं और इस माहौल के कारण उनकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

 विवाद

निशु आज़ाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के बाद चर्चा में आई थीं। विवाद तब बढ़ गया जब जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के साथ हुई झड़प में निशु के पिता संजय आज़ाद के सिर पर गंभीर चोट आई।

इस घटना के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया था, लेकिन आरोप है कि उसके समर्थकों ने गाजियाबाद में निशु के घर पर पथराव किया और परिवार पर मकान खाली करने का दबाव बनाया। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने निशु आज़ाद और उनके पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत काउंटर-शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसमें उन पर सोशल मीडिया के जरिए हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है।


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