BRICS : संप्रभुता, कानून और विकास... शी जिनपिंग ने बताया पश्चिम एशिया की शांति का 4-सूत्रीय रास्ता

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए एक 4-सूत्रीय शांति योजना का प्रस्ताव रखा है। मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने में अग्रणी (पायनियर्स) की भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

शी जिनपिंग के 4-सूत्रीय प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र के लोगों को गंभीर क्षति पहुंचाई है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के खिलाफ है। शांति स्थापित करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित चार सिद्धांतों को अपनाने पर जोर दिया: 

  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व (Peaceful Coexistence): क्षेत्र के सभी देशों के बीच आपसी मतभेदों को दरकिनार कर शांति से एक साथ रहने की भावना को बढ़ावा देना। 
  • राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान (Respect for National Sovereignty): किसी भी देश की सीमाओं और संप्रभुता के उल्लंघन तथा उनके आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का पूरी तरह से विरोध करना। 
  • अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन (Adherence to International Law): संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) के सिद्धांतों को बनाए रखना और ताकत के बजाय कूटनीति तथा बातचीत के नियमों का पालन करना। 
  • विकास और सुरक्षा में समन्वय (Coordination of Development and Security): क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के साथ-साथ आर्थिक व सामाजिक विकास को समान महत्व देना। 

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