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सेवा की कहानी: आजीविका डबरी से लक्ष्मी प्रसाद को मिला दोहरा लाभ, मछली पालन से आमदनी और खेती को सिंचाई का सहारा
- ग्रामीण रोजगार योजना से बनी डबरी में पिछले वर्ष से कर रहे मछली पालन, करीब 20 क्विंटल उत्पादन का आकलन
- मछली बिक्री से लगभग एक लाख रुपये की आय, डबरी के पानी से साग-सब्जी और गेहूं की खेती में भी मिल रही मदद
- जल संरक्षण के साथ आजीविका का बना आधार, एक ही संरचना से खेती और मछली पालन को मिला संबल
खेत में बनी आजीविका डबरी ने सरगुजा जिले के लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए आय और सिंचाई, दोनों का रास्ता खोल दिया है। डबरी में संग्रहित पानी में मछली पालन कर परिवार अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहा है, वहीं इसी पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की खेती की सिंचाई में भी किया जा रहा है। पिछले वर्ष से मछली पालन कर रहे लक्ष्मी प्रसाद ने मछली बिक्री से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है।
बतौली विकासखंड निवासी लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि उनकी माता के नाम से ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवार की जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया है। डबरी बनने के बाद उन्होंने इसे केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मछली पालन शुरू कर इसे अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया। इससे परिवार को खेती के साथ आजीविका का एक और साधन मिला है।
मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी
लक्ष्मी प्रसाद के अनुसार डबरी में मछली उत्पादन का आकलन करीब 20 क्विंटल तक है। मछली की बिक्री से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। वे हर साल डबरी में करीब 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं और मछलियों की बढ़वार एवं उत्पादन के अनुसार बिक्री करते हैं।
लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं, “पिछले साल से मछली पालन कर रहा हूं। करीब 20 क्विंटल का आकलन है और मछली बेचकर लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। हर साल 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं।”
साग-सब्जी और गेहूं की खेती को भी मिल रहा पानी
आजीविका डबरी ने परिवार के लिए सिंचाई की सुविधा भी बढ़ाई है। डबरी में संग्रहित पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे आवश्यकता के समय खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिल रही है।
एक ही जल संरचना का उपयोग मछली पालन और खेती दोनों में होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। मछली पालन से जहां अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ है, वहीं सिंचाई की सुविधा से खेती को भी सहारा मिला है।
जल संरक्षण के साथ आजीविका का बना आधार
डबरी में बरसाती पानी के संग्रहण और उसके आजीविका गतिविधियों में उपयोग ने लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए नई संभावनाएं तैयार की हैं। उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग कर परिवार खेती के साथ मछली पालन को भी आगे बढ़ा रहा है।
लक्ष्मी प्रसाद ने आजीविका डबरी की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि डबरी से मछली पालन के जरिए आय मिलने के साथ खेती-बाड़ी के लिए पानी उपलब्ध होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत लक्ष्मी प्रसाद की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि जल संरक्षण के लिए तैयार छोटी संरचना को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण परिवार खेती के साथ आय के अतिरिक्त साधन भी विकसित कर सकते हैं। आजीविका डबरी उनके परिवार के लिए जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन—तीनों का उपयोगी आधार बन गई है।
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