SIR विवाद: फॉर्म 6 में बदलाव पर राहुल गांधी के आरोपों को EC ने बताया 'भ्रामक'

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भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण 'फॉर्म 6' में अनधिकृत बदलावों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को "भ्रामक" करार दिया है। यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के घोषणा खंड में किए गए बदलावों से जुड़ा है।

यह विवाद बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर केंद्रित है, जिसमें आवेदकों को यह बताना अनिवार्य किया गया है कि क्या वे या उनके माता-पिता पहले से नामांकित थे।

  • राहुल गांधी और विपक्ष: राहुल गांधी ने एक्स (X) पर दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने के लिए "अवैध रूप से" फॉर्म 6 में बदलाव किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी का हवाला दिया कि अदालत ने कभी इन बदलावों को मंजूरी नहीं दी थी। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इन बदलावों के कारण मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए।
  • सुप्रीम कोर्ट: सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने टिप्पणी की कि उसने संशोधित फॉर्म 6 को स्पष्ट रूप से मंजूरी नहीं दी थी और इस संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया।
  • चुनाव आयोग: निर्वाचन आयोग ने इन बदलावों का बचाव करते हुए कहा कि SIR को सर्वसम्मति से लागू किया गया था और इसे 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन प्राप्त है। आयोग ने अपने सितंबर 2026 के प्रेस नोट का भी हवाला दिया।
  • भारतीय जनता पार्टी : भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल रिकॉर्ड का निरीक्षण करने को कहा है, फॉर्म को अवैध नहीं ठहराया है।
     

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