UP चुनाव 2027: सपा से बढ़ते तनाव के बीच छोटे दलों को साध रही कांग्रेस

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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले छोटे क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क बढ़ा रही है। यह रणनीति कांग्रेस और उसके मुख्य राज्य सहयोगी, समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट-बंटवारे की बातचीत में बढ़ते तनाव के बीच सामने आई है।कांग्रेस, राज्य में सपा के सामने "छोटे भाई" की भूमिका निभाने से पीछे हटना चाहती है। चूंकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव कथित तौर पर छोटे क्षेत्रीय संगठनों से दूरी बना रहे हैं, इसलिए ये दल एक बड़े गैर-भाजपा मोर्चे में जगह पाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व से संपर्क कर रहे हैं।  

राज्य कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने गठबंधन के ढांचे के लिए एक अल्टीमेटम जारी करते हुए "समान सम्मान और समान हिस्सेदारी" की मांग की है, और कथित तौर पर राज्य की 403 सीटों में से लगभग 150 से 200 सीटों की मांग की है। वही समाजवादी पार्टी ने अपने मजबूत संगठनात्मक ढांचे का हवाला देते हुए इस मांग का विरोध किया है। अखिलेश यादव का मानना है कि सीटों का वितरण पूरी तरह से उम्मीदवार की जीतने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए। सपा नेताओं का तर्क है कि बहुत अधिक सीटें देने से गठबंधन का अंतिम गणित बिगड़ सकता है।

जाति-आधारित और छोटे प्रभावशाली दलों के साथ स्वतंत्र संबंध बनाकर, कांग्रेस सीट-बंटवारे की मेज पर अपनी सौदेबाजी की ताकत मजबूत करने की कोशिश कर रही है। साथ ही, वह 2024 के आम चुनावों के दौरान मिले पिछड़े और हाशिए के मतदाताओं के समर्थन को पूरी तरह से भुनाना चाहती है।


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