श्रीलंका में भारतीय कंपनी के 3 हार्ट स्टेंट मॉडल वापस, केंद्र सरकार ने दिए गुणवत्ता जांच के निर्देश

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श्रीलंका में भारतीय निर्मित कोरोनरी स्टेंट्स (Stents) पर प्रतिबंध और तीन मॉडलों को वापस लिए जाने के बाद, भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को इस मामले में सुरक्षा और गुणवत्ता की गहन जांच करने का निर्देश दिया है।

विवाद और घटनाक्रम
यह कार्रवाई राज्यसभा सांसद और पेशे से डॉक्टर अजीत माधवराव गोपीचड़े की एक औपचारिक शिकायत के बाद शुरू हुई है। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि श्रीलंका के राष्ट्रीय औषधि नियामक प्राधिकरण (NMRA) की मेडिकल डिवाइस इवैल्यूएशन कमेटी ने भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माता कंपनी 'मेरिल लाइफ साइंसेज' (Meril Life Sciences) द्वारा निर्मित तीन ड्रग-इल्यूटिंग स्टेंट (DES) मॉडलों को गुणवत्ता चिंताओं के कारण बाजार से वापस लेने का आदेश दिया है। 

स्टेंट्स में पाई गईं मुख्य खामियां
श्रीलंकाई डॉक्टरों और जांच समितियों द्वारा इन तीन विशेष मॉडलों में चार प्रमुख यांत्रिक और क्लिनिकल कमियां पाई गईं:

  • स्टैंट का सही स्थान पर न बैठना (Improper Positioning): सर्जरी के दौरान स्टेंट धमनी में अपनी सही जगह पर स्थापित नहीं हो पा रहा था।
  • स्टैंट का खिसकना (Stent Dislodgement): इंप्लांटेशन के बाद उपकरण अपने तय स्थान से हिल जा रहा था।
  • एक्यूट स्टेंट थ्रोम्बोसिस (Acute Stent Thrombosis): स्टेंट के अंदर अचानक खून का थक्का जमने की गंभीर समस्या देखी गई, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है और आपातकालीन सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
  • पूरी तरह से न फैलना (Inadequate Expansion): हृदय की संकुचित धमनियों को खुला रखने के लिए स्टेंट का जितना फैलना आवश्यक था, वह उतना नहीं फैल पा रहा था।

भारत में नियामक जांच की मांग
कैबिनेट सचिवालय के निर्देश के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि क्या भारत के मौजूदा मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 और सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने की जरूरत है। सांसद गोपीचड़े ने मांग की है कि मरीजों की सुरक्षा के लिए देश में बेचे और प्रत्यारोपित किए जाने वाले प्रत्येक स्टेंट की सख्त निगरा होनी चाहिए और बैच व सीरियल नंबर के जरिए उनकी डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीलंका में इन तीन मॉडलों को हटाए जाने का मतलब यह नहीं है कि भारत में बने सभी कोरोनरी स्टेंट असुरक्षित हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की आंतरिक जांच रिपोर्ट के बाद ही भारत में इन मॉडलों पर किसी अग्रिम कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।


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