तालिबान के शिक्षा प्रतिबंधों का बचाव कर विवादों में जाकिर नाइक

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विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक को अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान के प्रतिबंधों का बचाव करने को लेकर तीन देशों में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में नाइक ने लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर रोक को प्रतिबंध के बजाय अस्थायी स्थगन बताया। उनका तर्क था कि सुरक्षा व्यवस्था और महिला शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा फिर से शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अफगान महिलाओं के लिए इस्लामिक अध्ययन और शरिया की पढ़ाई के अवसर उपलब्ध हैं।

नाइक के बयान पर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के पिता और शिक्षा कार्यकर्ता झियाउद्दीन यूसुफजई ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अनिश्चितकालीन प्रतिबंध को अस्थायी स्थगन बताना तालिबान की नीतियों को धार्मिक वैधता देने जैसा है। अफगानिस्तान की निर्वासित सांसद मरियम सुलेमानखिल ने भी सवाल उठाया कि जब तालिबान ने महिलाओं के काम करने पर पाबंदियां लगा रखी हैं, तो महिला शिक्षकों की कमी कैसे दूर होगी।

संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ के अनुसार, सितंबर 2021 से अब तक 26 लाख से अधिक अफगान लड़कियां माध्यमिक शिक्षा से वंचित हैं। दिसंबर 2022 से महिलाओं के विश्वविद्यालयों में प्रवेश पर भी रोक है। अफगानिस्तान फिलहाल दुनिया का एकमात्र देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं को माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा से आधिकारिक रूप से बाहर रखा गया है।


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