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रायपुर: किसानों ने निकाली ट्रेक्टर रैली, तीन कृषि कानूनों की वापसी को बताया ऐतिहासिक जीत
किसान आंदोलन के 1 वर्ष पूरे होने एवं संविधान दिवस के अवसर पर रायपुर राजधानी में ट्रैक्टर रैली एवं सभा का आयोजन किया गयासभा के बाद प्रधानमंत्री, राज्पाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया, सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की फासिस्ट मोदी सरकार द्वारा बड़े औद्योगिक घरानों के हित में पारित किए गए किसान कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानूनों को रद्द करने और सभी कृषि उपज को समर्थन मूल्य में खरीदी की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर 26 नवंबर से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत हैं , आज 1 साल पूरा हो गया,अब तक 700 से ज्यादा किसानों ने शहादत दी है, उनके बारे में आज तक मोदी जी ने एक भी शब्द नहीं कहा, हजारों किसानों पर फर्जी केस दायर कर रखा है, बिजली बिल 2020 वापस लेने की बात कही है ,पर अब तक वापस नहीं किया गया है ,आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बड़े भावनात्मक रूप से तीन काले कृषि कानूनों की वापसी की बात कही है ,जो राजनीति से प्रेरित है, क्योंकि उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में आगामी दिनों में विधानसभा चुनाव होना है, देश के किसानों से माफी मांगते हुए कहा कि हम कुछ किसानों को
समझा नहीं पाए, यह हमारी कमजोरी है, लेकिन हमारे द्वारा लाया गया कृषि कानून बिल्कुल सही है, यह सब बातें मोदी सरकार पर शक पैदा करने के लिए मजबूर करती है। क्योंकि पूर्व में मोदी जी ने नोटबंदी के समय भी कहा था, कि काला धन वापस आएगा पर नहीं आया,15लाख रुपए प्रत्येक व्यक्ति के खाते में आएगा नहीं आया ,दो करोड़ों लोगों को प्रतिवर्ष नौकरियां मिलेगी नहीं मिला और तो और इन 7 सालों में मोदी सरकार ने तमाम सार्वजनिक क्षेत्रों को ही बेच दिया है.जनता आर एस एस/ बी जे पी सरकार पर क्यों यकीन करें ? जबकि आज देश बेरोजगारी, महंगाई, भुखमरी ,भ्रष्टाचार से परेशान हैं और मोदी सरकार जाति धर्म, मंदिर मस्जिद के नाम पर संप्रदायिकता का गंदा खेल खेला जा रहा है.इसलिए मोदी सरकार को इस आंदोलन में शहीद हुए किसान परिवारों से माफी मांगनी चाहिए तथा प्रत्येक किसान परिवार को एक करोड़ रुपए आर्थिक सहायता प्रदान करना चाहिए, जिन किसानों पर फर्जी केस दायर किया गया है, उन्हें तत्काल वापस लेने चाहिए किसानों के फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी पर इसी सत्र में कानून बनाया जाना चाहिए, एपीएमसी को पूरे देश में मजबूती से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए.इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ-साथ किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए कृषक संगठन के प्रमुख, कृषि विशेषज्ञ ,सरकार के आला अधिकारियों को लेकर एक कमेटी बने जो किसानों की अन्य समस्याओं पर चर्चा कर निर्णय कर सके, तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगी ।
राज्य में कांग्रेस की सरकार है, आदिवासियों की हित की बात करती है, लेकिन आज भी आदिवासियों को जमीन का मालिकाना हक आज तक नहीं मिला है, बेमौसम बारिश ,प्राकृतिक आपदाओं एवं जानवरों से फसलों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा मिलना चाहिए ,विकासखंड मैनपुर मे मक्का खरीदी केंद्र और गरियाबंद जिले में मक्का प्रोसेसिंग केंद्र का निर्माण किया जाना चाहिए, औद्योगिक प्रयोजन हेतु कृषि भूमि का अधिग्रहण पर रोक लगाने चाहिए। आदिवासियों ग्रामीणों के नाम पर बनाए गए फर्जी मामले वापस लिए जाना चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में पांचवी - छठवीं अनुसूची लागू होना चाहिए, लेकिन सरकार की इच्छाशक्ति के अभाव के चलते आज भी लागू नहीं है, फर्जी ग्रामसभा बंद होना चहिए। आदिवासी क्षेत्र मैनपुर में धान उपार्जन केंद्र की स्थापना होना चाहिए, सिलगेर मे, विगत 7 माह से जारी आंदोलन का समर्थन करते हुए मांग किया गया कि आंदोलन मे मारे गए लोगों को एक करोड रुपए का मुआवजा एवं प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिया जाना चाहिए, साथ ही साथ आंदोलनकारियों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान करना चाहिए। राज्य सरकार ने पेसा कानून पर सुझाव मांगे हैं, हमारा मानना है कि भूरिया कमेटी की अनुशंसा को ही मान लिया जाए।आज की सभा की अध्यक्षता आदिवासी भारत महासभा के अध्यक्ष कामरेड भोजलाल नेताम ने किया। संचालन अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव कामरेड तेजराम विद्रोही एवं पुरान मेश्राम ने किया। सभा को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर एवं अलग-अलग संगठनों से आए प्रमुख साथी जुगनू चंद्राकर सौरा यादव, रघुनंदन साहू, विश्वजीत हरोडे, मदन लाल साहू,उत्तम साहू, अर्जुनसिंग नायक, बलबिंदर सिंग पन्नू, रिंकू रंधावा, हेमंत टंडन, इंदर मरकाम, लोकेश्वरी नेताम ,पदम लाल नेताम, सुनील मरकाम ,जयलाल सोरी, बिनाचंद मरकाम, कांति मरकाम, दीपक मंडावी, महेंद्र नेताम ,अमृतलाल नागर, टीकम नागवंशी, पूरन मेश्राम, चिमन नेताम, तेजराम विद्रोही, भोजलाल नेताम, अंजू मेश्राम,सुरेखा जांगडे,पारस नाथ साहू एवं अन्य साथियों ने अपना विचार रखे औऱ प्रिया एवं उनके साथियों ने क्रांतिकारी जन गीत प्रस्तुत किये।
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