ध्यानचंद का ध्यान किसे है..?
लेखक - संजय दुबे
भारत को देश दुनियां में 1971के पहले तक किस खेल में जाना जाता था, अगर ये प्रश्न संघ लोक सेवा आयोग सहित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पूछा जाता तो एक ही उत्तर होता -हॉकी। ये प्रश्न भी पूछ लिया जाता कि दुनियां में हॉकी का जादूगर किसे कहा जाता है तो भी मेजर ध्यानचंद का नाम आसानी से ले लिया जाता।
इस खिलाड़ी के बलबूते पर भारत तीन बार ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीता था।इसी खिलाड़ी के समर्पण का असर है कि भारत पिछले दो ओलंपिक खेलों में हॉकी का मेडल लेकर आया है। इस खिलाड़ी के जन्मदिन को अधिकृत रूप से राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। असाधारण खिलाड़ी के प्रदर्शन और उपलब्धि से उस देश के लोग प्रेरणा ले सके जहां पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब ,खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब की सीख मिलती है।
हमारे देश में खिलाड़ियों को एक जमाने तक विशिष्ट नही माना जाता था। यहां तक क्रिकेट के भी खिलाड़ी साधारण ही हुआ करते थे।1971में वेस्ट इंडीज और इंग्लैंड को उन्ही के सरजमी पर हराने के बाद अगले बारह साल तक देश में सुनील गावस्कर सहित दो तीन खिलाड़ी याद रहा करते थे।1983से देश में कपिल क्रांति ने ऐसा सैलाब लाया कि देश का राष्ट्रीय खेल हॉकी गर्त में जाने लगा। इसके बावजूद एक था ध्यान चंद, का किस्सा खत्म नहीं हुआ। वे यादों में रहे, दिमाग में रहे।
अब बात आती है सम्मान की। देश किनके प्रति कृतज्ञ रहे?केवल नेताओ के प्रति? नही कदापि नहीं। इस देश ने वैज्ञानिकों,समाजसेवको,अर्थ शास्त्रियों,कलाकारों के प्रति भी कृतज्ञता दिखाई है। देश में नागरिक अलंकरण पुरस्कार रखे गए है। पद्म श्री से लेकर भारत रत्न तक पुरस्कार है। सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न खिलाड़ियों को नहीं दिया जा सकता था क्योंकि भारत रत्न के लिए जिन क्षेत्रों को चयनित किया गया था उनमें खिलाड़ी वर्ग था ही नही।इसमें खिलाड़ियों की नही चयन कर्ताओं की गलती थी जिन्हें न तो खेल की महत्ता का अंदाजा था और न ही सोच रही होगी।खेल कूद कर खराब बनने वालों को कोई और सम्मान दे दो। हां, अर्जुन पुरस्कार ठीक रहेगा। ज्यादा ही बेहतर कोई खेल लिया तो पद्म श्री, भूषण, विभूषण दे देंगे।भारत रत्न! कौन खिलाड़ी डा राधाकृष्णन, पंडित जवाहरलाल नेहरु, बाजपाई, एपीजे कलाम,लता मंगेशकर, सुब्बा लक्ष्मी, मदर टेरेसा के बराबर खडा हो सकता है?
इस सोच को एक आदमी ने तो बदला।भले ही उनकी सोच क्या थी ये वे जाने लेकिन एक फोन पर सचिन तेंडुलकर को सारे कायदे कानून को ताक में रख कर प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह को कहा कि 200टेस्ट खेलने वाले, 100शतक लगाने वाले सचिन तेंडुलकर को "भारत रत्न"देने की घोषणा हो। ये व्यक्ति राहुल गांधी थे।
सचिन तेंडुलकर क्रिकेट के भगवान माने जाते हैं।उनको भारत रत्न मिला तो सभी खुश हुए। इस खुशी के बाद एक स्थाई दुख आज तक साल रहा है।ये बात है मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न सम्मान न दिया जाना। भला तीन तीन गोल्ड मेडल दिलाने वाले जादूगर की जादूगरी क्यों समझ में नहीं आता है? मैं कई बार आंकलन करता हूं तो पाता हूं कि ध्यान चंद जी एक गलती जरूर हुई कि वे खेल के बाद किसी राजनैतिक दल की विचारधारा से सहमत नही हुए अन्यथा खोज खोज कर राजनैतिक लाभ के लिए मरने के बाद19व्यक्तियों मरणोपरांत भारत रत्न बनाया गया है। बीसवा भी दे देते तो नाम होता कि खेल जगत में सही के भारत रत्न को रत्न माना गया है।
ध्यान चंद को भारत रत्न तो नही दिया गया उल्टा एक भारत रत्न के नाम पर चल रहे खेल रत्न पुरस्कार में से व्यक्ति का नाम काट कर ध्यान चंद का नाम जोड़कर पुरस्कार के नाम पर विवाद जोड़ दिया गया। इस प्रकार की घटिया राजनीति ध्यान चंद के नाम पर क्यों हुआ ये आश्चर्य की बात है।इसके बावजूद मैं पिछले दस साल से ये मांग कर रहा हूं कि ध्यानचंद, भारत रत्न के हकदार है। उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।उन्हें भारत रत्न मिलेगा।
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