मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और तीरंदाजी संघ
लेखक- संजय दुबे
राजा महाराजाओं के युग में खेल के नाम पर सीमित खेल हुआ करते थे।कुश्ती, घुड़सवारी, रथ दौड़ सहित कुछ ही खेल थे। युद्ध के आयुध में प्रवीणता के नाम पर अभ्यास की परीक्षा ही प्रतियोगिता का रूप लिया करती थी। खेल और खिलाड़ी हमेशा से राजतंत्र कह ले या प्रजातंत्र के दौर में संरक्षण में ही पले है बढ़े है।
देश और राज्यो में ओलंपिक संघ, क्रिकेट संघ सहित लगभग बहुत सारे खेलों के राष्ट्रीय खेल संघों से मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय संघ है। राज्य ओलंपिक संघ और क्रिकेट संघ के अध्यक्ष राज्य के पदेन मुख्य मंत्री ही होने की अच्छी परंपरा है ।इससे खेल और खिलाड़ियों को प्रशासनिक कठनाई नही होती है। खिलाड़ी चाहते है कि उनका ध्यान खेल पर केंद्रित रहे और उनके प्रबंधन का काम राज्य के मुखिया (मुख्यमंत्री) की देखरेख में हो जाए तो हाथ कंगन को आरसी क्या! हाल ही में राज्य स्तरीय धनुर्धर संघ का गठन हुआ और विष्णु देव साय नए अध्यक्ष बन गए। भारत का इतिहास देखे तो इस देश को दो धनुर्धर अर्जुन और कर्ण के नाम से दुनियां जानती है। इनके तुमिर में एक से एक बाण हुआ करते थे। ब्रम्हास्त्र जैसे बाण का आव्हान कर प्रयोग करने की अद्भुद क्षमता देश के धनुर्धरों में थी।इनके अलावा वनांचल में रहने वाले आज भी धनुर्विद्या में विलक्षण प्रतिभा रखते है। एकलव्य की धनुर्विद्या का उदाहरण हमारे सामने है। इस देश में शब्दभेदी बाण चलाने वालो की लंबी फेरहिस्त है
पश्चिमी देशों ने हर खेल को तकनीकी रूप से नया रूप दे दिया है। आदिकाल से देश ने तीर कमान या धनुष बाण साधारण तरीके के हुआ करते थे। प्रत्यंचा दमदार बनाने के लिए मजबूत लकड़ी का उपयोग होता था। जंगल में रहने वाले भोजन और आत्मरक्षा के लिए इस शस्त्र का उपयोग करते आए है। बाण समय के साथ बदलते गए है। धनुर्विद्या खेल के रूप में आधुनिक हुआ तो सुसज्जित उपकरण के रूप में आविष्कृत हो गया। धनुर्विद्या में उपयोग होने वाले उपकरण में जब बाण चढ़ाया जाता है तब ये अहसास होता है कि ये धनुष बाण है।
राज्य के धनुर्विद्या से जुड़े खिलाड़ी आशान्वित हो सकते है कि मुख्य मंत्री विष्णु देव साय के अध्यक्ष बनने से भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिता राज्य में आयोजित होगी। इन स्तर के खिलाड़ी राज्य से निकलेंगे। कोई भी खेल और खिलाड़ी तभी अपने प्रदर्शन पर केंद्रित हो सकता है जब उसकी चिंता फिकर, राज्य के मुखिया करे। देश के अंतराष्ट्रीय तीरंदाजो को राज्य में बुलाना,सम्मान देने की शुरुवात से राज्य श्री गणेश कर सकता है। आर्मलेस तीरंदाज शीतल कुमारी, दुनियां के लिए बेमिसाल उदाहरण है।शुरुवात, इसी खिलाड़ी के सम्मान से हो जाए।
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