Babuaa Desk

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   काल्पनिक दुनियां में विचरना इंसान की शगल होती है।इसी बात को ध्यान में रखकर मनोरंजन के लिए फिल्मों का आविष्कार हुआ।भारत में1913से फिल्मे बनना शुरू हुई । मूक फिल्म "राजा हरिश्चंद्र" के माध्यम से दर्शकों ने पर्दे पर किरदारों को चलते देखा।1931में बोलती फिल्मों का दौर "आलम आरा" से शुरू हुआ। कालांतर में ब्लैक एंड व्हाइट के बाद रंगीन फिल्मों के दौर में अनेक नायकों ने लोगों का मनोरंजन किया। दिलीप कुमार, ट्रेजेडी किंग कहलाते थे।राज कुमार,राज कुमार, देवानंद, एक एक युग थे। बिना हाव भाव वाले राजेंद्र कुमार जिनकी 25फिल्मे लगातार सिल्वर जुबली मनाई,इसके चलते वे जुबली कुमार भी कहलाए।अर्बन हीरो देवानंद थे,जिनकी महिलाएं दीवानी हुआ करती थीं। इन सभी की दीवानगी लोगो ने देखा सुना लेकिन दो नायक ऐसे आए जिन्होंने हीरोइज़्म की परिभाषा बदल कर रख दी। ये दो नायक है राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का मतलब; प्रेम और विद्रोह

21 Oct 2024 05:34AM,
by: Babuaa Desk