Mahak Qureshi

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रायपुर, 07 मई 2026/ छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। सेवा सेतु- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

07 May 2026 01:09PM,
by: Mahak Qureshi
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​रायपुर,07 मई 2026/ ​छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'सुशासन तिहार 2026' के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम उलखर और बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े नावापारा में  शिविरों का आयोजन किया गया, जहां 1400 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। उलखर शिविर में जहां 638 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं बड़े नावापारा में 836 ग्रामीणों ने अपनी मांगों और शिकायतों के निराकरण हेतु पंजीयन कराया।
       ​कलेक्टर  ने दोनों ही शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन कर यह जानने का प्रयास किया कि ग्रामीणों को किन क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग ने नि:शुल्क जांच शिविर लगाया, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा जाल वितरण और समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र व पेंशन जैसी सुविधाएं तत्काल प्रदान की गईं। राजस्व विभाग ने किसान पुस्तिका और बी-1 के वितरण में तत्परता दिखाई, तो खाद्य विभाग ने पात्र हितग्राहियों को नए राशन कार्ड सौंपे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने से कई परिवारों के अपने घर का सपना साकार हुआ।
      ​प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ यह शिविर सामाजिक सरोकारों का भी गवाह बना। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कर उन्हें उपहार दिए गए और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का मन मोह लिया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने जल बचाने की सामूहिक शपथ ली। इस सफल आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर कार्य किया, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सका। सुशासन तिहार: उलखर और बड़े नावापारा में उमड़ा जनसैलाब

07 May 2026 01:09PM,
by: Mahak Qureshi
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रायपुर ,07 मई 2026/बस्तर की पहचान अब धीरे-धीरे बदल रही है। पारंपरिक खेती वाले इस क्षेत्र में अब बागवानी के नए प्रयोग सफल होने लगे हैं। महात्मा गाँधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित क्रांतिकारी डेब्रिधुर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर के वैज्ञानिकों की 09 वर्षों की सतत मेहनत ने इतिहास रच दिया है। पहली बार बस्तर में लीची के पौधों में सफल फलन हुआ है, जिसे कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस सफलता की शुरुआत वर्ष 2016-17 में हुई थी, जब तत्कालीन वैज्ञानिक डॉ. गणेश प्रसाद नाग ने अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर से लीची की उन्नत किस्मों को लाकर जगदलपुर स्थित महाविद्यालय प्रक्षेत्र में रोपण कराया। उस समय बस्तर की जलवायु में लीची की खेती को लेकर कोई ठोस उदाहरण मौजूद नहीं था, बावजूद इसके वैज्ञानिकों ने इसे चुनौती के रूप में लिया और शोध कार्य शुरू किया। लीची से बदलेगी बस्तर की तस्वीर

07 May 2026 01:09PM,
by: Mahak Qureshi