Vikash Kumar

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हमारे देश मे आज़ादी के पहले से लेकर जब राजा हरिश्चन्द्र जैसी मूक फिल्म ने जन्म लिया था उसके बाद से पहली बोलती फिल्म आलमआरा से लेकर आज तक विशुद्ध मनोरंजन के लिए पहली पसंद फिल्में ही रही है। इन्ही फिल्मो में बने नायकों के अभिनय में पुरुषों ने खुद को रखकर जीवन के सुख दुख को अनुभूत किया है।नायकों के दमदार अभिनय ने थियेटर में ही दर्शको को नौ रस में डुबाने का सामर्थ्य भी रखा।ऐसे ही एक नायक, तत्समय उनको महानायक ही मानना चाहिए क्योंकि वे अभिनय के हर रंग में रंगे। दुख का दामन थामा तो वे एक दौर के बाद खुद अवसाद में डूब गए थे। ऐसे दौर से निकलने के लिए वे हास्य के रंग में भी दिखे तो दर्शको ने उनके अभिनय का लोहा माना। वे फिल्मो की दुनियां में ज्वार भाटा के माध्यम से आये थे इसके बाद उनके अभिनय में निखार हर फिल्म के साथ आते रहा। देवदास, यहूदी,नया दौर, मधुमति, पैगाम, मुग़ल ए आजम,गंगा जमुना, लीडर, दिल लिया दर्द दिया, राम औऱ श्याम, संघर्ष, दास्तान, गोपी उनके पहले दौर की वे फिल्में थी जिसमे केवल औऱ केवल दिलीप कुमार थे। अभिनय में वे शायद जान डालने के लिए ही जन्मे थे।उनको देखकर कभी ये नही लगा कि वे अभिनय कर रहे है बल्कि ऐसा लगता कि जिस किरदार में उन्हें रखा गया है उसे वे आत्मसात कर चुके रहते थे। उनके आगमन के दौर में ट्रेजडी का मसाला अनिवार्य था सो वे इतना रमे कि ट्रेजडी किंग कहलाने लगे। उनके अभिनय काल मे देश में डाकू समस्या बड़ी समस्या रही सो दिलीप साहब भी गंगा जमुना में ऐसे डाकू बने कि आनेवाले कलाकारों को बहुत मेहनत मशक्कत करनी पड़ गयी। दिलीप साहब को लोग ज्यादा जानते है तो मुगल ए आजम के लिए। सलीम की भूमिका के लिए शायद तब से लेकर अब तक कोई भी कलाकार जोखिम मोल नही ले पाया है। यदि आपमे से जिस किसी ने इस फिल्म को देखा होगा तो प्यार किया तो डरना क्या गीत में दिलीप साहब के मौन अभिनय की दमदारी को भी समझ सकते है। अभिनय के सौदागर

08 Jul 2021 01:10AM,
by: Vikash Kumar
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मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक एक लाख 41 हजार घरों में पहुंचकर छह लाख 27 हजार 363 लोगों की मलेरिया जांच कर चुकी है। इस दौरान पॉजिटिव पाए गए 4735 मरीजों का मौके पर ही इलाज शुरू किया गया है। बस्तर संभाग के सातों जिलों में इस अभियान का चौथा चरण 15 जून से शुरू किया गया है। वहीं सरगुजा संभाग के पांचों जिलों में इस अभियान का दूसरा और प्रदेश के नौ अन्य जिलों में पहला चरण संचालित किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा संभाग में पूर्व में संचालित इस अभियान के अच्छे नतीजों को देखते हुए मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को इस बार कुल 21 जिलों में विस्तारित किया गया है। 

07 Jul 2021 01:57PM,
by: Vikash Kumar