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आदिकाल से जब युद्ध अपने से साम्रज्यवादिता के लिए अपरिहार्य हुआ करता था तब युद्ध मे अनेक प्रकार के अस्त्र शस्त्र भी हुआ करते थे। तीर कमान,तलवार, गदा,चक्र जैसे सामान्य अस्त्र शस्त्र तो थे ही एक विशिष्ट प्रकार का भी अस्त्र शस्त्र हुआ करता था जिसे भाला कहा जाता है। अगर आप महाभारत काल मे जाए तो धर्मराज युधिष्ठिर को उत्कृष्ट भाला प्रयोगक माना जाता है। गुरु द्रोण ने युधिष्ठिर को भाला का सर्वश्रेष्ठ शिष्य बताया था। महाभारत युद्ध मे शल्य को युधिष्ठिर ने भाले से ही मारा था।युग बीता देश, लुटेरे आक्रमणकारियों के लुटेरेपन का शिकार हुआ। देश के राजा महाराजाओं के प्रतिद्वंद्विता औऱ देसी गद्दारो के चलते गुलाम , मुगल काबिज़ हुए। मुगलो को महाराणा प्रताप ने अपने भाले की नोंक पर उन्होंने मानसिंह की ग़द्दारी को चुनोती दी थी। आज तक देश महाराणा प्रताप के शौर्य की गाथा गाता है। नीरज चोपड़ा और उनका भाला

09 Aug 2021 04:06AM,
by: Vikash Kumar
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मोहम्मद इस्माइल ख़ान, जंग के मैदान का पुराना नाम ,अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रांत की लड़ाई में बड़ा चेहरा बनकर सामने आया है। पिछले दो हफ़्तों में ख़ान ने हथियार उठाकर तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई का नेतृत्व किया है. नतीजतन कई अफ़ग़ान समाचार एजेंसियों ने हेरात शहर के बचे रहने का श्रेय ख़ान और उनके लड़ाकों को दिया है । निजी अख़बार अरमान-ए-मेली ने अपने संपादकीय में लिखा, "अगर आमिर इस्माइल ख़ान और उनके कमांड में काम करने वाले उनके वफ़ादार नहीं होते, तो हेरात तालिबान के क़ब्ज़े में होता... इस्माइल ख़ान और 'सार्वजनिक विद्रोही बलों' की वीरता भरी तेज़ प्रतिक्रिया ने ख़तरे को दूर कर दिया और तालिबान को भारी नुक़सान पहुंचाया।

09 Aug 2021 03:35AM,
by: Imran Khan