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हर व्यक्ति के बचपन से लेकर जवानी औऱ आगे के जीवन मे कुछ लोग बड़े ही आदरणीय होते है,विशिष्ट होते है।ऐसे लोगो का संघर्ष, त्याग देखकर यकीन नही होता कि ईश्वर ऐसे लोगो को भी सृजित करता है। राजनीति मेरा क्षेत्र नहीं है। मैं किसी भी दलगत राजनीति का हिस्सेदार नहीं हूं लेकिन कोई भी सजग व्यक्ति राजनीति से सरोकार रखने वालों के आदर्श से परे नही हो सकता है। इस लेख को पढ़ कर ये आंकलन न हो कि अटल जी का प्रशंसक होने का अर्थ कुछ और भी है।अटल जी विरोध और समर्थन दोनो के समवेत स्वर थे। उन्हें जो अच्छा लगा उसे अच्छा कहा बुरा लगा सो बुरा कहा। वे मतभेद को स्वीकारने औऱ मनभेद से दूर रहने वाले व्यक्ति थे। इंडिया से भारत और भारत से हिंदुस्तान का सपना उनका अपना था जिसके लिए वे संघर्ष की पराकाष्ठा तक गए। सफल हुए। देश मे अनेक सुभीता औऱ सुविधा के प्रधानमंत्री बने लेकिन अटल जी जुदा थे। उनकी लोकप्रियता का मुकाबला न तो नेहरू न इंदिरा गांधी न ही राजीव गांधी और न ही नरेंद्र मोदी कर पाएंगे क्योकि वे अल्पमत के बहुमत थे। उनकी सृजन शीलता उन्हें राजनैतिक व्यक्तित्व से कही ज्यादा एक संवेदनशील व्यक्ति बनाती थी। वाकपटुता ऐसी कि लगता उनको बस सुनते रहो। मेरे अटलबिहारी

16 Aug 2021 05:52AM,
by: Babuaa Desk