इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज श्रृंखला की शुरुआत आज से हो गई है। ब्रिस्बेन में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। स्टार्क ने मैच के पहली ही गेंद पर रोरी बर्न्स को बोल्ड कर दिया। वह एशेज सीरीज में पहली ही गेंद पर विकेट लेने वाले एरनी मैकॉर्मिक के बाद दूसरे गेंदबाज बन गए। स्टार्क ने 85 साल के लंबे अंतराल के बाद यह करिश्मा किया है।
08 Dec 2021 06:08AM,by: Naveen kumar sahu
आज बाजार हरे निशान पर खुला। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 524.91 अंक या 0.91 फीसदी की बढ़त के साथ 58,158.56 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 138.55 अंक या 0.81 फीसदी की तेजी के साथ 17,315.25 के स्तर पर खुला। मंगलवार को सेंसेक्स तेज बढ़त लेकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी, ने भी कारोबार के अंत तक शुरुआती बढ़त बरकरार रखी। शेयर बाजार: बढ़त के साथ खुला सेंसेक्स, निफ्टी में भी तेजी
08 Dec 2021 05:26AM,by: Naveen kumar sahu
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री केदार कश्यप babuaa.com से कहा है कि विभिन्न धान ख़रीदी केंद्रों से किसानों का धान रिजेक्ट करने की आ रही ख़बरें प्रदेश सरकार की किसानों के प्रति घोर संवेदनहीनता की परिचायक हैं, जबकि किसानों की फसल प्रदेश सरकार के हठीलेपन और षड्यंत्रकारी मानसिकता के कारण बेमौसम बारिश में खराब हुई है। श्री कश्यप ने कहा, भाजपा ने प्रदेश सरकार को आगाह किया था कि प्रदेश सरकार 01 नवम्बर से धान ख़रीदी शुरू नहीं करके किसानों को आपदा का शिकार बनाया है और अब उसे हर हाल में किसानों का पूरा धान मापदंडों को शिथिल करके ख़रीदना चाहिए।
08 Dec 2021 05:26AM,by: Imran Khan
अगर आपको आंख बंद कर धर्मेंद्र की किसी फिल्म का नाम लेने के लिए कहा जाए तो शायद आप शोले का नाम ले सकते है ये फिल्म उनके कद काठी के अनुरूप की आदतन फिल्मो की एक कड़ी थी लेकिन मैं जिस धर्मेंद्र को जानता हूं वह धर्मेंद्र सत्यकाम, दोस्ती, चुपके-चुपके, दिल्लगी फिल्म का धर्मेंद्र है। आमतौर पर व्यावसायिक मसाले वाली फिल्मों में जिस कलाकार को एक बार सफलता मिल जाती है उसके बाद फिल्में बदलती जाती है लेकिन नायकत्व जस का तस रहता है। धर्मेंद्र जब फिल्मो में आये तो पारिवारिक विषयो के इर्दगिर्द ही कथानक घूमा करती थी।जब दर्शक विषयांतर हुआ तो अपराध जगत का आगमन हुआ। खलनायक के खलनायकत्व को खत्म कर बुराई पर अच्छाई की जीत का नया संसार जन्म लिया तो भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में दरासिंग हीमेन नही कहलाये बल्कि धर्मेंद्र को ये खिताब मिला था। अमूमन वे हर फिल्म में बुरे किरदारों के नायक हुआ करते थे।अगर उनकी फिल्मों का पोस्टमार्टम किया जाए तो वे इतनी चोरी कर चुके है कि वे अमेरिका में रहते तो पांच एक सौ साल की सज़ा पा जाते। उनकी ऐसी भी फिल्मो को हमने देखा है लेकिन एक ऐसा व्यक्ति जिसकी दंतपंक्ति दर्शनीय हो और मुस्कान कहर बरपाने वाली हो उसको भले ही शोले पहिं में वीरू के रूप में देखना सुखनवर हो लेकिन इस कलाकार की आत्मा को देखना हो तो निश्चित रूप से सत्यकाम,चुपके चुपके,दोस्ती, और दिल्लगी जरूर देखना चाहिए। ये फिल्में धर्मेंद्र के वीरू छाप फिल्मो से पलट अहिंसक फिल्में है जिनमे धर्मेंद्र को ज्यादातर एक अध्यापक की भूमिका में जीने का अवसर मिला था। इन फिल्मों में धर्मेंद्र की आत्मा को इस बात का सुकून मिला होगा कि उन्हें खलनायको को पीटने से निजात तो मिली। इन फिल्मों में वे सम्मान के हकदार है ये बात मैं दमदारी से कहूंगा। इनसे जुदा एक फिल्म जेहन में है- प्रतिज्ञा। ये फिल्म मेरी पसंदगी की रही है क्योंकि अपने स्वभाव के विपरीत धर्मेंद्र की हास्य भूमिका में आना पड़ा था।नाच न आने के बावजूद नाचना पड़ा था। एक अदद से नायक -धर्मेंद्र
08 Dec 2021 05:26AM,by: Naveen kumar sahu
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