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देश के पहाड़ो,जंगलो में अभावों के बावजूद सदियों से जीने वाले आदिवासियों को आदिवासी इसीलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी,अपनी परंपराओ को जीवित रखा, अपनी प्रथाओं को आत्मसात किये रहे। उन्हें शहरो की चकाचौंध ने पलायन के लिए मजबूर नही किया। वे घने जंगलों में प्राकृतिक संसाधनों से अपनी आजीविका चलाते रहे, उन्हें धन पिपासा कभी नही रही। यही वजह है कि वे कम संसाधनों में भी खुश रहते है अभाव उन्हें सालती नही है। यही वजह है कि वे गीत गाते है, स्वनिर्मित वाद्य यंत्र बजाते है, अपने पूर्वजो और अपने बनाये लय ताल पर थिरकते है,। उनके जीवन मे गीत, संगीत और नृत्य का विशेष महत्व है बेमिसाल राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव

01 Nov 2021 04:16PM,
by: Naveen kumar sahu