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क्या है मामला: नवदीप सूरी (जो यूएई, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया में भारत के राजदूत रह चुके हैं) ने बताया कि उन्होंने बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) के पास जाकर अपना वोटर आईडी और आधार कार्ड जमा किया था, जहां उन्हें सब कुछ सही होने का भरोसा दिया गया।  2003 के डेटा से मिसमैच: बाद में उन्हें मैसेज मिला कि उनके दस्तावेज वर्ष 2003 के SIR डेटा से मेल नहीं खा रहे हैं और उन्हें अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज लाने को कहा गया।  सूरी का तर्क: उन्होंने कहा कि 2003 में वे लंदन में भारतीय उच्चायोग में तैनात थे और उन्होंने उस समय की SIR प्रक्रिया में भाग नहीं लिया था।  आम नागरिकों पर सवाल: उन्होंने सरकार के 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) के नारे पर तंज कसते हुए लिखा, "अगर तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद मुझे अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी हो रही है, तो आम नागरिक का क्या हश्र होता होगा?" 

24 Aug 2026 07:57AM,
by: Babuaa Desk
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आर्थिक आधार पर आरक्षण: प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कोटा तय करने के लिए जाति के बजाय आर्थिक स्थिति (पारिवारिक आय) को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को ही सरकारी सहायता मिल सके।  एक परिवार, एक आरक्षण नियम: आंदोलनकारियों का तर्क है कि आरक्षण का लाभ एक परिवार की केवल एक पीढ़ी को ही मिलना चाहिए।  UGC नियमों में बदलाव की मांग: युवाओं ने जनवरी 2026 में लागू किए गए UGC रोस्टर नियमों (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग फ्रेमवर्क) को वापस लेने और भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव की पुरजोर वकालत की।  SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की समीक्षा: प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कुछ कड़े प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करने की मांग उठाई।  सुनसेट क्लॉज (समाप्ति तिथि): आरक्षण नीति के लिए एक निश्चित अंतिम तिथि (Sunset Clause) तय करने तथा आरक्षित वर्ग की खाली सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने की मांग की गई।

24 Aug 2026 01:07AM,
by: Babuaa Desk