07 Apr 2021

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  अगर मैं कहूं कि मेरा बचपन जिन फिल्मसितारो के साथ किशोरावस्था, युवावस्था  गुजरा तो उनमें एक कलाकार जितेंद्र भी है। फिल्म इंडस्ट्री में एक कतार स्थापित नंबर 1 सितारों की रही है जो अपने अभिनय क्षमता के दम पर स्थापित रहे है। जितेंद्र के समय मे राजेश खन्ना,अमिताभ बच्चन जैसे अतिप्रतिभावान सितारे थे जिनके लिए बड़े बड़े निर्माता निदेशक थे,लेकिन जिस देश मे अस्सी करोड़ दर्शक हो और अनेकता की भरमार हो तो ऐसे कलाकारों की जरूरत भी रही जो मसाला फिल्मो के नायक रहे।इस मसाला संस्कृति फिल्मो से राजेश खन्ना औऱ अमिताभ भी नही बच सके थे।खैर बात तो उस कलाकार की है जिसने देश के लोगो को डांस का सही अर्थ समझाया, सालो तक जस का तस दिखने के लिए उपाय समझाया,औऱ सबसे बड़ी बात अपनी बेटी को अपने पैर में खड़े होने का साहस दिया। आज देश विदेश में बालाजी टेली फिल्म प्रोडक्शन , मनोरंजन का बहुत बड़ा हाउस है। एकता,जितेंद्र की बेटी है जो किसी समय मे मंडी हाउस दिल्ली में जमे दलालों के प्रभुत्व के बीच अपनी जगह बनाई थी वो भी 18 साल की उम्र में। जब टेलीविजन में निजी चैनल्स की भरमार हुई तो ये बेटी एक नंबर की सिरियल निर्माणकर्ता बन चुकी थी।"कहानी घर घर की" एक नाटकीयता ही सही लेकिन सच  थी। "क्योंकि सास  भी कभी बहु थी" सच ही तो था। बेटियां आसमान छूना  चाहती है तो मुझे लगता है कि हर पिता में एक जितेंद्र होना चाहिए।
 जितेंद्र, को जम्पिंग जैक कहा जाता था क्योंकि वे नाचते समय अपने स्टेप में नृत्य के व्यायाम को भी जुड़वा लेते थे।ठुमके वे नायिकाओं से बेहतर लगा लेते थे।  जब तक वे नाच  कर फिल्म चला सकते थे तब तक नाचे, जब लगा कि आंसू बहाव सामाजिक फिल्मो से काम चल जाएगा तब तक वैसी भी फिल्मो में काम किया। जब प्रयोगवादी फिल्मो में काम करना चाहा तो गुलज़ार  का पजामा कुर्ता,चश्मा,मूछ उधार लेकर परिचय,किनारा जैसी फिल्मों में आ गए। उम्र ने उनको बड़ा किया तो दक्षिण की फिल्मो का हिन्दीकरण कर श्रीदेवी, जया प्रदा के साथ साथ कादर खान,शक्ति कपूर की जोड़ी  बना कर "हिम्मतवाला" बने।  गुलजार की मूछ को पतली सी मूछो में बदल कर जितेंद्र मसाला फिल्मो के नए किरदार बन गए।  वे बहुत उम्र तक जवान रहे,फिट रहे, वे जानते थे कि मीठा औऱ मोटापा  सगे संबंधी है इस कारण वे मीठे से  सफलतापूर्वक बचते रहे। बाला जी पर उनका विश्वास अटल  है,अपने हर काम को वे ईश्वर को सौप देते है, जो मिला उसे प्रसाद मान लेते  है
आज जितेन्द्र  78 के हो रहे है।उनको आज चुस्त दुरुस्त,जवान दिखने की आदत है सो कृत्रिम जवानी उनके साथ है।
 वे आज भी मस्त बहारों के आशिक़ है
धन्यवाद, जितेंद  जन्मदिन  में एक बंजारा गाता है, जीवन के गीत सुनाता है।
  मस्त बहारों का ये आशिक़

07 Apr 2021 07:59AM,
by: Babuaa Desk
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रायपुर : राज्य के वनमण्डल बिलासपुर स्थित कानन पेण्डारी जूलॉजिकल गार्डन में ग्रीष्म ऋतु के मद्देनजर वन्य प्राणियों को राहत पहुंचाने के लिए हर आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। इस संबंध में वनमण्डलाधिकारी बिलासपुर कुमार निशांत ने बताया कि सभी शाकाहारी वन्यप्राणियों हेतु शेड के ऊपर हाथी घास, आवश्यकतानुसार ग्रीन नेट तथा सभी वन्यप्राणियों के मोट में स्वच्छ पीने के पानी की व्वस्था की गई है। इसी तरह भालू, सियार, लोमड़ी, शुतुरमुर्ग, बायसन के मोट में स्वच्छ पानी एवं स्प्रींकलर की व्यवस्था की गई है। साथ ही मांसाहारी वन्यप्राणियों के नाईट शेल्टर में कूलर, एक्जास्क तथा केज में स्प्रीकलर, क्राल में ग्रीन नेट एवं मोट में पानी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पक्षी केज में खस की चटाई की व्यवस्था की जा रही है। कानन पेण्डारी जू में पुराने पाईप लाईन के दुरूस्तीकरण का कार्य जारी है। जू में पानी की उपलब्धता के लिए पुराने 10 बोर चालू अवस्था में है और दो नग नए अतिरिक्त बोर किया गया है। जू के हिप्पोपोटामस केज में शावर की व्यवस्था की जा रही है।

07 Apr 2021 07:59AM,
by: Thaneshwar sahu