08 Sep 2021

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मुझे तो एतराज है ,आपको भी होना चाहिए आज राजधानी से प्रकशित होने वाले लगभग सभी समाचारपत्रों ने एक शीर्षक :"सीएम के ........" लगाकर एक खबर प्रकाशित किया है। ये शीर्षक हर उस व्यक्ति को व्यथित करनेवाला होना चाहिए जो सामाजिक है। जिसके पिता है, भाई है, या अन्य चाचा,मामा, या अन्य रिश्ता है। यह शीर्षक हर राजनैतिक सरोकार रखने वाले को व्यथित करने वाला होना चाहिए साथ ही संविधान की जानकारी रखनेवाले अधिवक्ताओं सहित जागरूक व्यक्तियों को भी चिंता करने वाला होना चाहिए। सबसे पहले तो हमे ये समझना चाहिए कि सीएम या मुख्यमंत्री पद सामाजिक या राजनैतिक पद नही है बल्कि भारत के संविधान की धारा 163 (1) के तहत राज्यपाल को उसके कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता औऱ सलाह देने के लिए बने मंत्री-परिषद का प्रधान पद है जिसे सीएम या मुख्यमंत्री कहा गया है। संविध में जितने भी संवैधानिक पद है उनके बारे में उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक अवधारणा का उल्लेख नही है। इस आधार पर मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति की सिवाय संवेधानिक पद के अलावा कोई सामाजिक अवधारणा नही की जा सकती है। इस अवधारणा से परे जाकर समाचार पत्रों में शीर्षक लगा दिया गया। मुख्यमंत्री के पिता

08 Sep 2021 05:17AM,
by: Naveen kumar sahu
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रायपुर - प्रदेश भाजपाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नन्द कुमार बघेल के खिलाफ हुई कारवाई को सामाजिक-धार्मिक सौहार्द के हित में बताया है. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते मुख्यमंत्री ने इस तरफ ध्यान दिया होता तो आज हालात इतने नहीं बिगड़ते. श्री साय ने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही श्री बघेल लगातार देश-धर्म-जातियों के खिलाफ भड़काउ और उकसाउ बयानबाजी करते रहे थे. इससे पहले भी जब कांग्रेस सत्ता में थी, और भूपेश बघेल मंत्री थे, तब भी उनके पिता ने आपत्तिजांक किताब के द्वारा सामजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की थी. श्री साय ने कहा कि नन्द कुमार बघेल के नाम से बने प्रोफाइलों से नक्सलियों के हित तक में बयानबाजी अभी होती रही है. यहां तक कि हमारे राष्ट्र की आत्मा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी से भी बाज नहीं आ रहे थे बघेल. बघेल के खिलाफ हुई कारवाई व्यापक समाज हित में - भाजपा

08 Sep 2021 03:43AM,
by: Imran Khan