20 May 2026

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 जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बड़ेभंडार में भारत सरकार के ज्ञानभारतम मिशन के तहत चल रहे सर्वेक्षण अभियान के दौरान एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर सामने आई है। ग्राम के नंदे परिवार द्वारा लगभग 120 वर्ष पुरानी तालपत्र पांडुलिपियों का संग्रह आज भी सुरक्षित रूप से संरक्षित किया गया है। इन दुर्लभ पांडुलिपियों के मिलने से क्षेत्र की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है। नंदे परिवार के संग्रह में गीता, महाभारत, नित्य पूजन पद्धति, मंगल स्तुति, हरिवंश पुराण, कार्तिक माहात्म्य, माघ माहात्म्य, लक्ष्मी पुराण एवं श्राद्ध पद्धति सहित कुल 25 महत्वपूर्ण पांडुलिपियां संरक्षित हैं।
             ज्ञानभारतम मिशन के अंतर्गत प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण हेतु किए जा रहे सर्वे के दौरान सर्वेयर  प्रेमचंद मैत्री ने ग्राम पंचायत बड़ेभंडार के सचिव के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर ग्राम निवासी  मुरलीधर नंदे एवं उनके भाई  मंगल प्रसाद नंदे के निवास पहुंचकर पांडुलिपियों का अवलोकन एवं सर्वेक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि परिवार द्वारा वर्षों से इन प्राचीन तालपत्रों को अत्यंत सावधानी एवं श्रद्धा के साथ संरक्षित किया जा रहा है। श्री मुरलीधर नंदे ने बताया कि उनके परिवार में सुरक्षित यह पांडुलिपियां उनके दादा स्वर्गीय श्री सनातन नंदे द्वारा लिखी गई थीं। तालपत्रों पर उकेरी गई इन पांडुलिपियों में धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों का विस्तृत वर्णन है। परिवार द्वारा पीढ़ियों से इनका अध्ययन और संरक्षण किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने दादा से इन पांडुलिपियों का श्रवण और अध्ययन सीखा तथा वर्षों से इन्हें सुरक्षित रखने का कार्य कर रहे हैं। 
             इन तालपत्रों पर अत्यंत सुंदर एवं कलात्मक ढंग से लेखन और अंकन किया गया है, जो तत्कालीन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण माने जा रहे हैं। परिवार द्वारा प्रतिवर्ष विजयादशमी से कुमार उत्सव पूर्णिमा तक इन पांडुलिपियों की “पोथी स्थापना” कर विधिवत पूजा-अर्चना भी की जाती है। यह परंपरा वर्षों से लगातार चली आ रही है और परिवार अपने पूर्वजों की धरोहर को आज भी उसी श्रद्धा से संजोए हुए है। सर्वेक्षण की जानकारी मिलने पर जनपद पंचायत पुसौर के विकास विस्तार अधिकारी  बृज बंधु पटेल भी ग्राम बड़ेभंडार पहुंचे। उनके साथ ग्राम पंचायत के सरपंचओमप्रकाश गुप्ता तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती पुष्पांजलि दासे भी उपस्थित रहीं। सभी ने नंदे परिवार द्वारा संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण कार्य की मुक्तकंठ से सराहना की।
              विकास विस्तार अधिकारीबृज बंधु पटेल ने कहा कि भारत सरकार का ज्ञानभारतम मिशन देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि तालपत्र पांडुलिपियां हमारी ऐतिहासिक धरोहर की अमूल्य निधि हैं और इन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नंदे परिवार के वर्षों से किए जा रहे संरक्षण कार्य को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे परिवारों के प्रयासों से ही भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा जीवित बनी हुई है। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भविष्य में इन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

20 May 2026 01:57PM,
by: Heera Motwani
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एक संवेदनशील और दूरदर्शी सरकार की असली पहचान संकट के समय उसकी त्वरित तत्परता और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से होती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का हालिया बजट इसी लोक-कल्याणकारी सोच का जीवंत प्रमाण है। यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राज्य के विकास का एक ऐसा विज़न डॉक्यूमेंट है जहाँ एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं से नागरिकों को बचाने के लिए करोड़ों का अभेद्य वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार किया गया है, वहीं दूसरी तरफ भूमिहीन मजदूरों और ग्रामीणों को स्थायी आर्थिक संबल देने के लिए सरकार ने अपनी तिजोरी के द्वार खोल दिए हैं।

20 May 2026 01:57PM,
by: Kriti Dwivedi
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छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार द्वारा राज्य में सुशासन की नई परिभाषा लिखी जा रही है। इसका जीता-जागता उदाहरण 'सुशासन तिहार 2026' के रूप में सामने आ रहा है, जो ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए एक बड़ा राहत का माध्यम बन चुका है। जिले के दूरस्थ अंचलों में आयोजित समाधान शिविरों के जरिए प्रशासन सीधे जनता के द्वार पहुँच रहा है, जिससे वर्षों से लंबित समस्याओं का मौके पर ही निपटारा हो रहा है।
     ​इसी कड़ी में नारायणपुर के ग्राम भाटपाल से एक सुखद तस्वीर सामने आई है। यहाँ के ग्रामीण संताय पोटाई के लिए यह सुशासन तिहार उनके जीवन में एक नई सुबह लेकर आया, जब उन्हें शिविर में ही उनका नया राशन कार्ड तैयार कर सौंप दिया गया।

20 May 2026 01:56PM,
by: Kriti Dwivedi
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प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आम जनता को त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने बुधवार को जिला मुख्यालय बलौदाबाजार स्थित रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) परिसर से अत्याधुनिक तकनीकों से लैस 'नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112' वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
      ​इस नए बेड़े में डायल-112 के 12 सामान्य वाहनों के साथ-साथ गंभीर सड़क हादसों से निपटने के लिए 2 हाई-वे पेट्रोलिंग वैन और त्वरित जांच के लिए 1 मोबाइल फॉरेंसिक वैन शामिल है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन, कलेक्टर कुलदीप शर्मा और पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

20 May 2026 01:56PM,
by: Kriti Dwivedi
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सुकमा जिले का मिनपा क्षेत्र कभी नक्सलवाद, घने जंगलों और कठिन रास्तों के कारण विकास से दूर माना जाता था। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती थी। एक समय ऐसा था जब एक छोटी सी झोपड़ी में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई थीं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हार नहीं मानी और गांव-गांव पहुंचकर लोगों का इलाज किया। लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई गई।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं के चलते मिनपा क्षेत्र में अब बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 में यहां नया उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तैयार किया गया, जिसमें आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रयोगशाला कक्ष और आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था की गई।
आज यह उप स्वास्थ्य केंद्र मिनपा सहित दुलेड़, एलमागुंडा, भटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे दूरस्थ गांवों के लगभग 3,593 ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी सुविधा बन चुका है।
इस सफलता की सबसे बड़ी खासियत स्वास्थ्य कर्मचारियों का समर्पण है। पोट्टेमडगू, दुलेड़, गुंडराजपाड़ और भाटपाड़ जैसे पहुंचविहीन गांवों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को कठिन जंगल रास्तों से गुजरना पड़ता है। कई बार एक दिन में लौटना संभव नहीं हो पाता, तब कर्मचारी गांवों में रुककर ‘नाईट कैंप’ लगाते हैं और रात में भी मरीजों का उपचार करते हैं।
इसी मेहनत और सेवाभाव का परिणाम है कि आज मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। हर महीने यहां लगभग 4 सुरक्षित प्रसव कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों का संस्थागत प्रसव के प्रति भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
मिनपा स्वास्थ्य केंद्र की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 15 मई 2026 को इस केंद्र ने ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक’ (NQAS) कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपलब्धि मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मेडिकल ऑफिसर और जिला प्रशासन की सामूहिक मेहनत का परिणाम है।
एक छोटी झोपड़ी से शुरू हुआ यह सफर आज राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक पहुंच चुका है। मिनपा की यह कहानी बताती है कि मजबूत संकल्प, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और कर्मचारियों की निष्ठा से सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचाई जा सकती है।

20 May 2026 01:56PM,
by: Kriti Dwivedi