अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबानो ने शिकंजा कस लिया है साथ ही पुरे अफगानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया है। सोशल मीडिया पर कुछ फोटो तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह काबुल इंटरनेशल एयरपोर्ट का है, जो सोमवार, 16 अगस्त को सामने आया। अफगानिस्तान-तालिबान संघर्ष: जान बचाने, विमान में चढ़े लोग
16 Aug 2021 01:01PM,by: Naveen kumar sahu
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने सुष्मिता देव के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पार्टी सब कुछ जानकर भी अनजान बनती है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘सुष्मिता देव ने हमारी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। युवा नेता छोड़ते हैं जबकि हम ‘बुजर्ग’ पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रयास करते हैं तो उसके लिए हमें भी कसूरवार ठहराया जाता है।’’ सबकुछ जानकर भी अनजान है कांग्रेस: कपिल सिब्बल
16 Aug 2021 01:00PM,by: Naveen kumar sahu
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के साथ ही अब यहाँ की हालात बिगड़ते ही जा रही हैं। यहाँ के काबुल एयरपोर्ट पर फायरिंग हुई है। जिसके चलते कई उड़ाने रोक दी गई है। वहीं दूसरी ओर लोग अब देश छोड़कर भाग रहे हैं। लोगों को डर है कि तालिबान फिर से नागरिकों के साथ क्रूरता पूर्वक हरकतो को अंजाम देगा। पहले देश के मंत्री और नेता फरार हो गए। इसके बाद राष्ट्रपति भी देश छोड़कर चले गए। वहीं अब तालिबान हुकूमत के चलते लोगों में आतंक है।
16 Aug 2021 10:01AM,by: Naveen kumar sahu
हर व्यक्ति के बचपन से लेकर जवानी औऱ आगे के जीवन मे कुछ लोग बड़े ही आदरणीय होते है,विशिष्ट होते है।ऐसे लोगो का संघर्ष, त्याग देखकर यकीन नही होता कि ईश्वर ऐसे लोगो को भी सृजित करता है। राजनीति मेरा क्षेत्र नहीं है। मैं किसी भी दलगत राजनीति का हिस्सेदार नहीं हूं लेकिन कोई भी सजग व्यक्ति राजनीति से सरोकार रखने वालों के आदर्श से परे नही हो सकता है। इस लेख को पढ़ कर ये आंकलन न हो कि अटल जी का प्रशंसक होने का अर्थ कुछ और भी है।अटल जी विरोध और समर्थन दोनो के समवेत स्वर थे। उन्हें जो अच्छा लगा उसे अच्छा कहा बुरा लगा सो बुरा कहा। वे मतभेद को स्वीकारने औऱ मनभेद से दूर रहने वाले व्यक्ति थे। इंडिया से भारत और भारत से हिंदुस्तान का सपना उनका अपना था जिसके लिए वे संघर्ष की पराकाष्ठा तक गए। सफल हुए। देश मे अनेक सुभीता औऱ सुविधा के प्रधानमंत्री बने लेकिन अटल जी जुदा थे। उनकी लोकप्रियता का मुकाबला न तो नेहरू न इंदिरा गांधी न ही राजीव गांधी और न ही नरेंद्र मोदी कर पाएंगे क्योकि वे अल्पमत के बहुमत थे। उनकी सृजन शीलता उन्हें राजनैतिक व्यक्तित्व से कही ज्यादा एक संवेदनशील व्यक्ति बनाती थी। वाकपटुता ऐसी कि लगता उनको बस सुनते रहो। मेरे अटलबिहारी
16 Aug 2021 05:52AM,by: Babuaa Desk
खेल में जीत और हार ,आपके बस में नहीं है लेकिन प्रयास करना आपके बस में है। इसी प्रयास में कभी खिलाड़ियों के बीच से दो बार पदक जीतनेवाली पी वी सिंधु, नीरज चोपड़ा,चानू साइकोम मीरा,बजरंग पुनिया,लवलीना सहित मनप्रीत की टीम निकल जाते है। प्रयास असफल होता है मीरा कॉम, अदिति अशोक, मनु भाकर सहित रानी रामपाल की हॉकी टीम सामने हो जाती है। दिल को कही छूने की कोशिश
16 Aug 2021 03:00AM,by: Babuaa Desk
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