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भारत के दक्षिण को पूर्व,पश्चिम उत्तर की तुलना में ज्यादा कठिन क्षेत्र माना जाता रहा है।खासकर भाषाई मामले को लेकर विशुद्ध संस्कृत भाषा से उपजे तमिल, तेलगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा को पढ़ना, लिखना, और बोलना अत्यंत कठिन काम तो है ही, समझना भी आसान नही है। इन भाषाओं की लिपि देखकर तो और भी समझ मे आ जाता है कि ये भाषाएं सरल नही है। हिंदी भाषी क्षेत्र में इन भाषाओं के लोगों के आने के बावजूद इनका सम्मिश्रण नही हो पाया है लेकिन इन क्षेत्र के कलाकारों ने दक्षिण को जोड़ने का बहुत बड़ा काम किया है। दक्षिण की नायिकाओं ने तो हिंदी भाषी फिल्मो में ड्रीम गर्ल रही है। वैजयंती माला, पद्मिनी, हेमा मालिनी, जया प्रदा, श्रीदेवी,दिव्या भारती, लक्ष्मी, सहित अनेक नायिकाओं ने जोड़ने का काम किया है।नायकों में भी,अरविंद मोहनलाल, कमल हासन, नागार्जुन, चिरंजीवी नायको ने हिंदी फिल्मों में उपस्थिति दी लेकिन जिस कलाकार का जादू हिंदी भाषी क्षेत्र में सर चढ़ कर बोला वे रजनीकांत है। पश्चिम के जन्मे शिवाजी राव गायकवाड़ के बस कंडक्टर से नायक बनने की कहानी चाय वाले के प्रधानमंत्री बनने के समान ही है।  जादू का दक्षिण या दक्षिण के जादू

13 Dec 2021 04:56AM,
by: Naveen kumar sahu