01 Apr 2021

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  रायपुर :मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में कोरोना वायरस (कोविड-19) के बढ़ते प्रसार को देखते हुए पात्र लोगों से टीकाकरण कराने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि टीका के साथ-साथ सावधानी रखते हुए शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। यह प्रदेश को कोरोना मुक्त करने की दिशा में काफी मददगार साबित होगा। श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त संख्या में टीका उपलब्ध है। सभी जिलों में लोगों के टीकाकरण के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने सभी सामाजिक प्रमुखों, समाज सेवी संस्थाओं, धार्मिक संस्थाओं, व्यापारिक संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध लोगों को आमजन को अधिक से अधिक संख्या में टीकाकरण के लिए प्रेरित करने की अपील की है।

01 Apr 2021 10:05AM,
by: Thaneshwar sahu
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रायपुर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार अरूण कुमार बंछोर के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। अरूण कुमार बंछोर का आज सवेरे एम्स रायपुर में निधन हो गया। वे 53 वर्ष के थे। स्वर्गीय अरूण कुमार बंछोर के फेफड़े में दिक्कत होने के कारण पहले से ही एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। जिसके बाद उन्हें एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से स्वर्गीय अरूण कुमार बंछोर के परिवारजनों को दुख की इस घड़ी में संबल प्रदान करने और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। स्वर्गीय अरूण कुमार बंछोर दैनिक अमृत संदेश, सन स्टार एवं राष्ट्रीय मेल हिन्दी अखबारों में सेवाएं दी है।

01 Apr 2021 09:37AM,
by: Thaneshwar sahu
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 डालने जमाने को याद करता हूं तो भारतीय  फ़िल्म इंडस्ट्री में र शत्रुघ्न सिन्हा  की खलनायकी की बड़ी चर्चा हुआ करती थी, आगे चल कर शत्रुघ्न सिन्हा ने खलनायक से खल शब्द को हटा दिया और नायकों की बिरादरी में शामिल हो गए। दर्शकों ने शत्रुघ्न सिन्हा को खलनायक और नायक दोनों रूप में स्वीकार किया। शत्रु की एक खूबी रही कि उनके बोलने के लिए संवाद लेखकों को वजनदार  डायलॉग लिखने की मजबूरी रहा करती थी। श्याम आये तो कह देना छेनू आया था(मेरे अपने),अरे मेरे बदायूं के लल्ला(कला पत्थर) जैसे डायलॉग आज भी लोगो को खामोश कर देते है। शत्रुघ्न सिन्हा हिंदी भाषी फिल्मो में जो काम कर रहे थे लगभग वैसा ही काम तामिल सिनेमा में शिवाजी गायकवाड़  बनाम रजनीकांत में कर रहे थे।तमिल का शत्रुघ्न के रूप में उन्हें देखा जाता था लेकिन रजनीकांत को देशव्यापी शोहरत तब मिली जब वे कमल हासन के समान हिंदी फिल्मों में आये।उनकी तामिल फिल्मो की संख्या की तुलना में हिंदी फिल्में नही के बराबर है और वे मल्टी स्टार्स फिल्मो में ही सफल रहे लेकिन अभिनय प्रतिभा की बात करे तो रजनीकांत  एक डिफरेंट एक्टर रहे है।उनकी कुछ फिल्में जो हिंदी से तामिल में रूपांतरित हुई उनका तो तामिल में रिकॉर्ड तोड़ कमाई के किस्से बने  जो फिल्में तामिल में बनी और  डब होकर हिंदी में रूपांतरित हुई वे भी कमाई के मामले में अनोखी रही।शिवाजी, रोबोट,2.0, दरबार फिल्मो में वे अकेले ही धूम मचाये रहे। उनका करिश्माई अभिनय उनको देश मे अलग ही रूप में खड़ा करता है। वे ईमानदारी से जीवन के परिवर्तन को स्वीकारने वाले व्यक्ति रहे है। न तो उनको सार्वजनिक जीवन मे विग की मजबूरी ने कृत्रिम बनाया न ही महंगे कपड़ो के दिखावे ने उनको असहज बनाया, वे पजामा कुर्ता,धोती कुर्ता पहन कर अपने चहेतों के सामने रहे है इस कारण मेरी नज़र में वे अमिताभ बच्चन से 21 ही बैठते है। आज उनको भारतीय फिल्म में अद्वितीय योगदान के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए  चयनित किया गया है तो इसे सार्थक निर्णय के रूप में सभी स्वीकार करेंगे।150 से अधिक सफल फिल्मो के नायक को इससे बढ़िया पारिश्रमिक क्या दिया जा सकता है? वे पद्म भूषण और पद्म विभूषण तो पहले ही हो चुके है। अब केवल भारत रत्न बचता है तो  देर सबेर हिंदी तामिल को बराबरी की बात आयेगी तो अमिताभ और रजनीकांत तो है ना।
  रजनीकांत काले है तो क्या हुआ दिलवाले है!

01 Apr 2021 08:40AM,
by: Babuaa Desk