09 Mar 2021

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पाटन। सोमवार को छत्तीसगढ़ भाजपा विधायक दल ने पाटन विधानसभा अंतर्गत ग्राम बठेना में मृतक 5 सदस्यों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और मृतकों के संबंध में उनके परिजनों से बातचीत की साथ ही घटनास्थल का अवलोकन करने के बाद पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी ली। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यह घटना एकदम अविश्वसनीय और हृदय विदारक है, जनमानस में घटना को लेकर बेहद सनसनी का माहौल है, ऐसे में घटना से संबंधित वस्तुस्थिति को जल्द से जल्द सामने लाया जाना आवश्यक है इसलिए पुलिस घटना की निष्पक्ष जांच कर तत्परतापूर्वक उचित कार्यवाही करे।

09 Mar 2021 02:48AM,
by: Babuaa Desk
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हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाते हैं इसके माध्यम से हमारा लक्ष्य रहता है महिलाओं को सशक्त और सुदृढ़ बनाना। महिलाओं को उनके पूरे शक्ति और मानव अधिकारों के भरपूर इस्तेमाल करने की आजादी देना, ताकि वे जो हैं हो सकें। जिसका वे हकदार हैं वे भी पुरुषों की भांति सब कुछ सरलता से हासिल कर सकें। इन लक्ष्यों और वकलतों को पढ़कर, जानकर और सुनकर हमारे जेहन में एक प्रश्न उठता है कि "हमें महिलाओं को सशक्त और सुदृढ़ करने की वकालत करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?" जबकि भारतीय संविधान ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार कानूनों के माध्यम से भी महिला और पुरुषों को बराबर का अधिकार और अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार को जिम्मेदारी दी गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि विगत हजारों साल से हमने जिस पुरूष प्रधान समाज की मानसिकता से ग्रसित होकर महिलाओं के लिए अमानवीय रवैया अपना लिया है पुरुष को महिलाओं से श्रेष्ठ, महान और अधिक शक्तिशाली होने का कपोल कल्पित आइकॉन बना रखा है। पल-प्रतिपल महिलाओं को कमजोर प्रमाणित करने के लिए झूठे धार्मिक सिद्धांत, आधारहीन पारंपरिक नियम और पुरुषों के कुटिल बौद्धिक क्षमताओं के प्रयोग से श्रृंगार के नाम पर, सुंदरता, कोमलता और मर्यादा के नाम पर छला जाता रहा है। ये छलावा आज इतने हजारों साल बाद भी निरंतर जारी है.. कुछ कथित काल्पनिक धार्मिक सामाजिक सिद्धांतों की बात करें तो इसके आधार पर महिलाओं को हमेशा सुरक्षा की आवश्यकता होती है, उन्हें सृष्टि के संचालन के लिए संतानोत्पत्ति तथा कुल परिवार और पति के सेवा के लिए श्रमिक से अधिक कोई भी अधिकार देने के पक्ष में नहीं है, तरह तरह के व्रत उपवास के माध्यम से उन्हें जहां मानसिक रूप से शांत और संतुलित रहने की सीख दी जाती रही है वहीं उन्हें तरह तरह के आइडियाज के माध्यम से कोमल और सुंदर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है। महिलाओं के लिए केवल कर्तव्य निर्धारित कर बांध रखा गया है जबकि पुरुषों को अधिकार सम्पन्न बनाया गया है। पुरुषों को आज भी केवल महिलाओं पर राज करने के लिए शक्तिशाली बने रहने की शिक्षा दी जा रही है, तरह तरह के कठोर शब्दभेदी बाण के माध्यम से पुरूषार्थ की मानसिकता बनाकर पुरुषों को कठोर और क्रूर बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

09 Mar 2021 02:44AM,
by: Babuaa Desk