Thaneshwar sahu

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 रायपुर : आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजनांतर्गत राशन कार्डधारी हितग्राहियों एवं केन्द्र द्वारा सूचीबद्ध एसईसीसी हितग्राहियों को विभिन्न पात्रतानुसार वर्ष में 5 लाख रूपए तक की निःशुल्क चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। इस अभियान के दौरान जातीय जनगणना 2011 में वंचित श्रेणी हितग्राहियों का निःशुल्क आयुष्मान कार्ड बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को आधार कार्ड और राशन कार्ड साथ में लेकर अपने नजदीकी च्वाईस सेन्टर, कॉमन सर्विस सेन्टर में जाना होगा। जहां इनका आधार के द्वारा बायोमेट्रिक आथेटिकेशन के द्वारा बीआईएस, केवायसी कर पहली बार में पेपर आयुष्मान कार्ड दिया जायेगा। जिसके उपरांत बाद में हितग्राहियों को निशुल्क प्लास्टिक पीवीसी आयुष्मान कार्ड प्रदान किया जायेगा। हितग्राहियों से आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। पात्र हितग्राही अपने क्षेत्र के मितानिन से स्लीप प्राप्त कर नजदीकी च्वाईस सेन्टर में आधार कार्ड एवं राशन कार्ड के साथ जा सकते हैं। राशनकार्डधारी परिवारों का बनेगा आयुष्मान कार्ड

04 Mar 2021 07:40AM,
by: Thaneshwar sahu
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बलरामपुर : रंगों का त्यौहार होली आने वाला है, गुजरते ठण्ड और हल्की गर्मी भी मानों रंगों के त्यौहार के आगमन का संकेत दे रही है। रंगों का यह पर्व हमें प्रकृति के और करीब लेकर जाता है तथा रंग-गुलाल के साथ इसे मनाने की परम्परा है। बलरामपुर की महिला समूहों ने इस बार होली का त्यौहार नये ढंग से मनाने की तैयारी है। जहां एक ओर बाजार में रासायनिक रंग-गुलाल उपलब्ध हैं वहीं इन महिलाओं ने पालक, चुकन्दर, सिन्दूर एवं हल्दी से हर्बल गुलाल तैयार किया है और कृत्रिम रंगों से इतर होली का त्यौहार इस बार प्राकृतिक रंगों से ही मनाने की बात कर रही हैं। प्राकृतिक रंगों की मांग को देखते हुए महिलाओं ने इसका विक्रय भी प्रारंभ किया है जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हुई है। महिलाओं ने पहले ही दिन हर्बल गुलाल के 150 डिब्बों का विक्रय कर लगभग 5 हजार की आय प्राप्त की है तथा आगे भी इसका विक्रय जारी रहेगा। प्राकृतिक रंग तैयार करने में जुटी ग्राम चितमा के जयंती खलखो ने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र बलरामपुर के मार्गदर्शन में आदिवासी उपयोजनान्तर्गत 13 ग्रामों के महिला समूहों को तीन दिवसीय हर्बल गुलाल प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान पालक, चुकन्दर, सिन्दूर एवं हल्दी से हर्बल गुलाल तैयार करने की तकनीकी जानकारी देकर केन्द्र में ही गुलाल बनाना सिखाया गया। जयंती बताती हैं होली के त्यौहार में बाजार में गुलाल बेचे जाते हैं किन्तु हमें यह पता नहीं था कि पालक, चुकन्दर तथा सिन्दूर से भी रंग तैयार किये जा सकते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों ने हमें न केवल रंग बनाया सिखाया बल्कि इसकी पैकेजिंग तथा विक्रय हेतु भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। प्राकृतिक रंग बना रही एक और महिला झलरिया की सावित्री ने बताया कि होली के त्यौहार को देखते हुए हमने पर्याप्त मात्रा में रंग तैयार किये हैं तथा इसके विक्रय की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की पहल पर त्यौहार की खुशियों के बीच आर्थिक अवसर मिलने से हमारा मनोबल बढ़ा है। हमे इस बात की भी खुशी है कि केमिकल युक्त रंगों से अलग हम प्राकृतिक रंग तैयार कर रही हैं, जिसका शरीर पर कोई नाकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। सावित्री ने इस पहल के लिए प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि आगे भी ऐसे आजीविकामूलक कार्यों का प्रशिक्षण महिलाओं को दिया जाये ताकि वे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर हो सके। कलेक्टर श्याम धावड़े एवं जिला पंचायत सी.ई.ओ. श्रीमती तुलिका प्रजापति ने स्टाॅल का अवलोकन कर महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनसे गुलाल की खरीदी की। साथ ही उन्होंने कहा कि रंगोंत्सव को प्राकृतिक रंगों के साथ ही मनाया जाये ताकि स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

04 Mar 2021 06:05AM,
by: Thaneshwar sahu