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गंभीर आरोप: छात्राओं का आरोप है कि परिसर में रहने वाले प्रोफेसर अक्सर छात्रों को अपने आवास पर सामाजिक कार्यक्रमों के बहाने बुलाते थे, जहां वे उन पर अवांछित यौन दबाव बनाते थे। इसके अलावा, उन पर कक्षाओं के दौरान अभद्र और अनुचित टिप्पणियां करने का भी आरोप है। बढ़ती शिकायतें: मामला तब तूल पकड़ गया जब एक शुरुआती शिकायत के बाद कई वरिष्ठ और पूर्व छात्राएं भी सामने आईं। इसके बाद आईसीसी (ICC) के पास दर्ज औपचारिक शिकायतों की कुल संख्या बढ़कर 11 हो गई। प्रशासनिक प्रतिक्रिया: जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने स्पष्ट किया है कि यौन उत्पीड़न से जुड़े सभी मामलों को आईसीसी स्वतंत्र रूप से संभालती है। इस आंतरिक जांच में कुलपति कार्यालय का कोई हस्तक्षेप या प्रभाव नहीं है। आरोपी का पक्ष: आरोपी प्रोफेसर ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपने खिलाफ दर्ज ऐसी किसी भी शिकायत की कोई जानकारी नहीं है।

06 Sep 2026 08:08AM,
by: Babuaa Desk
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जाति और शंकराचार्यों पर टिप्पणी: याचिकाकर्ता का आरोप था कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यूट्यूब पर प्रसारित वीडियो में 'उपाध्याय' समुदाय को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके साथ ही उन्होंने चारों शंकराचार्यों को "फर्जी" बताया था। भावनाएं आहत होने का दावा: याचिका में दावा किया गया कि इन बयानों से समाज में उनकी अवमानना हुई और सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। निचली अदालतों को नजरअंदाज करना: याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में वाराणसी के पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं राज्य सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कभी स्थानीय थाने या मजिस्ट्रेट का दरवाजा नहीं खटखटाया।

06 Sep 2026 06:36AM,
by: Babuaa Desk