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फिल्म जगत आम भारतीयों के लिए एक ऐसा सपनो का संसार है जहां से हर व्यक्ति एक नायक नायिका की तरह से अपनी जिंदगी को रचाता बसाता है। पुरुषों में नायकत्व का असर बहुत होता है। वे अपने समय काल के नायकों का अनुशरण कर केश विन्यास रचते है, कपड़े पहनते है, भाव भंगिमाएं का अनुशरण करते है। इन्ही के माध्यम से अपने जीवन के नायिकाओं को प्रभावित करने का सफल असफल प्रयास भी नायकत्व का सशक्त पक्ष है। अवाक फिल्म राजा हरिश्चंद्र से लेकर सवाक फिल्म आलमआरा के बाद से 1947 तक के दौर में धार्मिक औऱ सामाजिक पृष्ठभूमि की फिल्मों में नायकत्व का दौर नही था। ईश्वर या सामाजिक परिवेश की भूमिकाओं में ही कलाकार जीते रहे लेकिन पहले नायक के रूप में अशोक कुमार, राजकपूर, दिलीपकुमार गुरुदत्त नही थे बल्कि देवानंद थे। वे रूमानी अभिनय के जादूगर थे जिनके चाहने वाले ही नही चाहने वाली भी थी। ब्लेक एन्ड व्हाइट से लेकर रंगीन फिल्मों के सफर में देवानंद हर प्रकार के अभिनय में जीते गए।"गाइड" उनकी बेमिसाल फिल्म के रूप में अंतरास्ट्रीय स्तर पर सराही गयी फिल्म थी। ये फिल्म दर्शनशास्त्र की फिल्म थी जिसमे आस्था के प्रश्न का बेमिसाल उत्तर था। उत्तरोत्तर देवानंद ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा औऱ इसमे भी वे बहुत अर्से तक स्वाद चखते रहे। अर्बन हीरो बनाम देवानंद

26 Sep 2021 06:58AM,
by: Naveen kumar sahu