07 Jun 2021

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ये बात पढ़ते समय कतई ध्यान में न रहे कि एक पक्ष का समर्थन करना स्वभावगत दूसरे पक्ष का विरोध होता है। अगर मैं अमिरियत का पक्षधर हूँ तो गरीबीयत का विरोधी नहीं हूं। मैं भी इंसान हूं। दुखी की दुख को समझता हूं लेकिन दुखी होने की स्थायी भावना या स्वार्थवश दुखी रहने का उपक्रम इस उम्मीद में भाव बना लेना कि अगर दुखी नही दिखे तो सुविधा से वंचित हो जाएंगे , ऐसे वाद औऱ व्यक्ति और विचारधारा का मैं समर्थक नहीं हूँ लेकिन सुखी के सुख को देख कर मेहनत करने वालो को हमेशा से मैंने ऊपर रखा है । देश के संविधान में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना का उद्देश्य प्रस्तावना में है जिसका मतलब कोई भी व्यक्ति मूलभूत सुविधा शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध जल आदि की न्यूनतम हक़दार रहे। सही है, न्यूनतम सुविधा मिलनी चाहिए और मिल भी रही है। अपेक्षा से ज्यादा भी। वे अपने हक़ के लिए सजग रहे लेकिन देश अर्थ से चलता है और इस व्यवस्था में सबसे बड़े लोग वे जो अपने आय या लाभ की हिस्सेदारी को देश के निर्माण में लगाते है उनको सुख के अधिकार से वंचित नही किया जा सकता है औऱ न ही किया जाना चाहिए। क्यो न आयकरदाता को सशुल्क वैक्सीन की सुविधा मिले

07 Jun 2021 07:26AM,
by: Vikash Kumar