Vikash Kumar

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देश की आजादी के लिए अपनी जान लुटा देने वाले अमर शहीद भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, असफाकउल्लाह, राजगुरु सहित न जाने कितने युवक थे जिनके नामो को अंग्रेजो ने तो अपने कमीनेपन के कारण आतंकवादी नाम देकर यथा नाम तथा गुण का परिचय दिया था अंग्रेजो के जाने के बाद इन महान हस्तियों को भुला देने की भी साज़िश हुई। नरमपंथी हमेशा लल्लोचप्पो के बदौलत ही गुलामी के कपड़े को बदल कर पहनते रहे है इसी के कारण इस देश की न तो राजभाषा जन्म ले सकी न ही धर्म। यहां तो राम भी पार्टीबन्दी के शिकार हो गए तो रामप्रसाद बिस्मिल कैसे बच पाते। उनका नाम भी देश की आज़ादी में बराबर की सहभागिता के कारण जाना जाता है। जितना गांधी का योगदान रहा उससे ज्यादा देश के शहीदों का है जिन्होंने पैदल चलने के बजाय देश के संसद भवन में बहरो की सरकार के कान में बात डालने के लिए बम फोड़ दिया।  कहाँ मिलेंगे बिस्मिल!

11 Jun 2021 01:01PM,
by: Vikash Kumar