Thaneshwar sahu

Generic placeholder image

बलौदाबाजार :राज्य की एकमात्र सैनिक स्कूल अम्बिकापुर में दाखिला के लिए अंतिम तिथि 19 नवम्बर से बढ़ाकर 3 दिसम्बर 2020 कर दी गई है। अम्बिकापुर सैनिक स्कूल के प्राचार्य कर्नल जितेन्द्र डोगरा ने जिला कलेक्टर सुनील कुमार जैन को इस आशय का पत्र भेजकर बलौदाबाजार जिले से ज्यादा से ज्यादा बच्चों को आवेदन कराने का अनुरोध किया है। प्राचार्य ने कहा है कि सैनिक स्कूल में कक्षा छठवीं एवं कक्षा नवमीं में प्रवेश दिया जाता है। इस वर्ष से बालिकाओं के लिए भी प्रवेश का प्रावधान किया गया है। प्रवेश परीक्षा रविवार दिनांक 10 जनवरी 2021 को निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर एक साथ होगी। आवेदन केवल ऑनलाईन स्वीकार किये जाएंगे। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेन्सी की वेबसाईट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एनटीए डॉट एसी डॉट इन अथवा एआईएसईई डॉट एनटीए डॉट एनआईसी डॉट इन पर पहुंचकर आवेदन किये जा सकते हैं।

24 Nov 2020 01:40PM,
by: Thaneshwar sahu
Generic placeholder image

धमतरी : ग्रीष्मकालीन रबी फसल (धान) लगाने सिंचाई के लिए प्रस्तावित ग्रामवार सूची जारी की गई है। कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन संभाग, कोड 90 ए.के.पालड़िया से मिली जानकारी के मुताबिक वृहद परियोजना पैरी बांयी तट मुख्य नहर प्रणाली से तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल (धान) लगाने सिंचाई के लिए पानी देना प्रस्तावित किया गया है। इनमें मगरलोड विकासखण्ड के ग्राम करेलीबड़ी में 700 हेक्टेयर, भोथीडीह 600 हेक्टेयर, ग्राम रांकाडीह में 400 हेक्टेयर, कुण्डेल में 390 हेक्टेयर, खिसोरा 280 हेक्टेयर, मोतिमपुर में 260 हेक्टेयर, हसदा में 195 हेक्टेयर, धौराभाठा में 100 हेक्टेयर, नवागांव 40 हेक्टेयर, भोथा में 20 हेक्टेयर तथा ग्राम आमाचानी में 15 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। सिंचाई के लिए पानी देने प्रस्तावित ग्रामवार सूची की गई जारी

24 Nov 2020 01:40PM,
by: Thaneshwar sahu
Generic placeholder image

धमतरी : कोविड-19 के संक्रमण के चलते वर्तमान शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान न होने पाए, इसके लिये छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा पढ़ई तुंहर दुवार कार्यक्रम चलाकर बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। जिले में इसका क्रियान्वयन भी बेहतर ढंग से हुआ, किंतु यहां के डूबान जैसे क्षेत्र में ऑनलाइन क्लास संभव नहीं है, जहां पर मोबाइल नेटवर्क की समस्या तो रहती ही है, साथ ही इस आदिवासी बाहुल्य इलाके के ग्रामीणों के पास एंड्रॉइड मोबाइल की उपलब्धता व डेटा व्यय का अतिरिक्त भार उठाने की क्षमता पालकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में उनके लिए ऑफलाइन शिक्षा के तहत पढ़ई तुंहर पारा काफी कारगर साबित हो रहा है। डूबान क्षेत्र के शिक्षकों के साथ-साथ पालकगण भी अपनी जागरूकता का परिचय देते हुए बच्चों में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं, जो अनुकरणीय है। यहां तक कि ग्राम की सरपंच भी बच्चों को शिक्षित करने में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर रही हैं, वहीं कुछ ऐसे पालक भी हैं जो अपनी रोजी-मजदूरी को छोड़कर बच्चों को पढ़ाने के लिए समय निकाल रहे हैं।

24 Nov 2020 01:40PM,
by: Thaneshwar sahu