Thaneshwar sahu

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रायपुर ; छत्तीसगढ़ शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से महिलाएं फायदा उठा रही हैं और अपना खुद का रोजी रोजगार बनाने में कामयाब हो रही हैं। इसी कड़ी में बस्तर जिले की महिलाएं जिला प्रशासन के दिशा निर्देश व मार्गदर्शन में समूह की महिलाओं को स्व-रोजगार, आजीविका एवं आत्मनिर्भर बनाने हेतु जिले में अनेकों प्रशिक्षणों का संचालन किया जा रहा है। इस कड़ी में विकासखंड बकावंड के ग्राम सांड्रा की महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को हस्त निर्मित धूपबत्ती एवं अगरबत्ती बनाना सिखाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मशीन द्वारा निर्मित अगरबत्तियों कि अपेक्षा लोगों में हस्त निर्मित अगरबत्तियों कि मांग ज्यादा है।  

03 Feb 2021 04:28PM,
by: Thaneshwar sahu
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 रायपुर :छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महा मण्डलेश्वर राजेश्री डॉ महंत रामसुन्दर दास की अध्यक्षता में महासमुंद में जिला पशु क्रूरता निवारण समिति की बैठक हुई। बैठक में गौशाला एवं पशु क्रूरता अधिनियम पर चर्चा हुई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा कि गोधन न्याय योजना और गौठान मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। राज्य सरकार गौवंश एवं गोधन के विकास का संकल्प लेकर कार्य कर रही है। गौ संरक्षण एव गौ संवर्धन के लिए सरकार हर तरह प्रयासरत् है। डॉ महंत ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में पशु रूग्णालय की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जिसमें घटना, दुर्घटना में घायल पशुओं की उपचार और देखभाल की जा सकेगी। उन्होंने उप संचालक पशुधन विकास को जिले में भू-खण्ड का चिन्हांकन करने को कहा। गौ वंश का संरक्षण हम सब मिल जुलकर करें तो उसे अच्छें से कर पायेंगे। उन्होंने गौशाला एवं गौठानों के संबंध में समिति के सदस्यों से सकारात्मक चर्चा कर आयोग की ओर से यथासम्भव सहयोग करने की बात कही। बैठक में पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुरवनमण्डलाधिकार सदस्य उपस्थित थे।

03 Feb 2021 03:58PM,
by: Thaneshwar sahu
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रायपुर :हौसला हो तो हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है, इसी हिम्मत के साथ कांकेर जिले के ग्राम पंचायत सरोना निवासी चिन्तामणी रामटेके अब दूसरों के चेहरे संवारने के साथ खुद की जिन्दगी भी संवार रही हैं। कुछ समय पहले तक वह जीवन से निराश जिंदगी जी रही थी। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें अपने तथा बच्चों के पालन पोषण करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। उनके पास आय का कोई जरिया भी नहीं था। इस बीच चिन्तामणी को उनके गांव की पर्यवेक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने छत्तीसगढ़ महिला कोष के बारे में जानकारी दी और उन्हें खुद के पैरों पर खड़े होने के लिए प्रोत्साहित किया।

03 Feb 2021 02:59PM,
by: Thaneshwar sahu